Nushrat Bharucha: बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई है। फिल्म 'प्यार का पंचनामा' और 'छोरी' में उनके अभिनय को काफी सराहा गया, लेकिन जब उन्होंने फिल्म 'जनहित में जारी' में एक कंडोम सेल्सगर्ल का किरदार निभाया, तो उन्हें समाज के एक वर्ग की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
जागरूकता फैलाने का प्रयास
फिल्म 'जनहित में जारी' में नुसरत भरूचा ने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया, जो समाज में कंडोम बेचकर लोगों को सुरक्षित यौन संबंधों के प्रति जागरूक करने का काम करती है। उनका यह किरदार एक साहसी पहल थी, जिसे कुछ लोगों ने खुले मन से स्वीकारा, तो वहीं कुछ ने उन्हें आलोचनाओं का शिकार बनाया।
भद्दी टिप्पणियों का सामना
जब नुसरत ने फिल्म के पोस्टर सोशल मीडिया पर साझा किए, तो कुछ लोगों ने उन्हें गंदे कमेंट्स और भद्दी टिप्पणियों का निशाना बनाया। नुसरत ने साहस दिखाते हुए एक वीडियो साझा कर कहा, "हाय दोस्तों, मैंने अपने इंस्टाग्राम पर दो पोस्टर डाले, जिसमें मैं एक वोमनिया कंडोम इस्तेमाल करने का खुलेआम प्रचार कर रही हूं, लेकिन लोगों ने इसके अलग ही मायने बना लिए। आमतौर पर हम इंस्टाग्राम पर अच्छे कमेंट शेयर करते हैं, लेकिन इस बार मैंने नकारात्मक टिप्पणियों को भी सबके सामने लाने का फैसला किया।"
वीडियो में नुसरत ने उन भद्दे कमेंट्स को दिखाया, जिनमें लिखा था, 'ऐसा पैकेट लेकर घूमने से मर्द नहीं हो जाओगे' और 'अपने कौम वालों में बताओ, ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को बोलो' जैसी बातें शामिल थीं। नुसरत ने इन टिप्पणियों का करारा जवाब देते हुए कहा, "बस यही सोच तो बदलनी है, यही तो मैं कह रही हूं। कोई बात नहीं, आप उंगली उठाओ, मैं आवाज उठाती हूं।"
फैंस का समर्थन
नुसरत की इस हिम्मत और बेबाकी पर उनके फैंस ने खुलकर समर्थन किया। एक फैन ने लिखा, "हम आपके साथ हैं मैम, यह बहुत गलत है।" एक अन्य ने कहा, "जवाब देने का शानदार तरीका। लोग शिक्षित होने के बावजूद संकीर्ण सोच रखते हैं।"
फिल्म का संदेश
फिल्म 'जनहित में जारी' का मकसद समाज में सुरक्षित यौन संबंधों और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता फैलाना था। नुसरत का किरदार उन लड़कियों की आवाज बना, जो रूढ़ियों को तोड़ने की हिम्मत करती हैं।
नुसरत की आस्था
नुसरत भरूचा अपनी निजी जिंदगी में भी बेहद खुले विचारों वाली हैं। मुस्लिम परिवार में जन्मी नुसरत हिंदू धर्म की मान्यताओं का भी सम्मान करती हैं और मंदिरों में पूजा-अर्चना करती हैं। नुसरत भरूचा का यह साहसिक कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास था, जो दर्शाता है कि महिलाओं को अपनी आवाज बुलंद करने का पूरा अधिकार है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।



