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Life Style: बच्चों और किशोरों की नींद सुधारने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय, जानिए...

Life Style: बचपन और किशोरावस्था में नींद की गड़बड़ी एक आम समस्या है, लेकिन समय रहते इस पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है. अक्सर देखा गया है कि पर्याप्त नींद न मिलने से बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. जानें...

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Viveka Nand
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Life Style: बचपन और किशोरावस्था में नींद की गड़बड़ी एक आम समस्या है, लेकिन समय रहते इस पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। अक्सर देखा गया है कि पर्याप्त नींद न मिलने से बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में स्लीप हाइजीन यानी नींद से जुड़ी हेल्दी आदतों को अपनाकर नींद की गुणवत्ता में काफी सुधार किया जा सकता है।


बेहतर नींद के लिए अपनाएं ये उपाय

1. नियमित बैडटाइम रूटीन तैयार करें

सोने से पहले रिलैक्सिंग एक्टिविटीज़ जैसे कि गर्म पानी से स्नान करना, हल्का संगीत सुनना, गहरी साँसें लेना, या किताब पढ़ना बच्चों को मानसिक रूप से शांत करता है और नींद लाने में मदद करता है। कैमोमाइल चाय (बिना कैफीन वाली) किशोरों के लिए उपयोगी हो सकती है।


2. ब्राइट लाइट और स्क्रीन टाइम सीमित करें

शाम के समय तेज़ रोशनी और स्क्रीन के संपर्क में आने से मस्तिष्क को भ्रम होता है कि अभी सोने का समय नहीं हुआ है। नीली रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन को रोकती है जो नींद को नियंत्रित करता है। इसलिए सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप आदि से दूरी बनाए रखें और कमरे में गर्माहट वाली मंद रोशनी रखें।


3. नियत समय पर सोना और उठना

हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और जागने से शरीर की आंतरिक घड़ी (सर्कैडियन रिद्म) बेहतर काम करती है और समय पर मेलाटोनिन रिलीज़ होता है। छुट्टी वाले दिन भी यह रूटीन बनाए रखना जरूरी है।


4. बेडरूम का वातावरण अनुकूल बनाएं

बच्चे का कमरा ठंडा, शांत और अंधेरा होना चाहिए। तेज़ आवाज़ और रोशनी से बचने के लिए इयरप्लग या स्लीप मास्क का उपयोग किया जा सकता है। गर्मी में एसी या पंखा कमरे के तापमान को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।


5. प्राकृतिक रोशनी से दिन की शुरुआत करें

सुबह के समय सूरज की रोशनी मिलना शरीर को यह संकेत देता है कि अब जागने का समय है। इससे मेलाटोनिन का स्तर कम होता है और बच्चे दिनभर ज्यादा सक्रिय रहते हैं।


6. कैफीन से दूरी बनाए रखें

चॉकलेट, एनर्जी ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स में कैफीन पाया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों को कैफीन से पूरी तरह परहेज़ करना चाहिए और किशोरों को भी इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, खासकर दोपहर 3 बजे के बाद नहीं।


7. दिन की नींद (नैप) को सीमित करें

अगर बच्चा दिन में बहुत ज्यादा सोता है, तो रात की नींद प्रभावित हो सकती है। अगर नैप लेना ज़रूरी हो, तो वह 30 मिनट से अधिक का न हो और दोपहर 3 बजे से पहले हो।


8. नियमित एक्सरसाइज करें

दिनभर शारीरिक गतिविधि करने से रात को नींद बेहतर आती है। लेकिन ध्यान रखें कि सोने से ठीक पहले की गई भारी एक्सरसाइज नींद में खलल डाल सकती है। सबसे अच्छा समय सुबह या दोपहर का होता है।


9. खान-पान का रखें ध्यान

रात को बहुत भारी खाना खाने से नींद में बाधा आ सकती है। सोने से लगभग 2 घंटे पहले हल्का और सुपाच्य भोजन करना बेहतर रहता है। साथ ही, बहुत ज्यादा पानी पीने से बार-बार उठकर बाथरूम जाना पड़ सकता है।


10. तनाव और चिंता को कम करें

अगर बच्चा किसी बात को लेकर चिंतित है, तो सोने से पहले उसके साथ खुलकर बातचीत करें। ज़रूरत हो तो ध्यान (माइंडफुलनेस), प्रेयर या जर्नलिंग जैसी एक्टिविटीज़ मदद कर सकती हैं।


ध्यान दें: स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज़ाना 9 से 12 घंटे की नींद और किशोरों को लगभग 8 से 10 घंटे की नींद की ज़रूरत होती है। अगर बच्चा दिन में बार-बार थका हुआ या चिड़चिड़ा महसूस करता है, तो यह संकेत हो सकता है कि उसकी नींद पूरी नहीं हो रही। सही नींद सिर्फ थकान दूर करने का जरिया नहीं, बल्कि बेहतर फोकस, मूड, और समग्र विकास का आधार है। इसलिए नींद से जुड़ी इन छोटी-छोटी बातों को जीवनशैली में शामिल करके बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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रिपोर्टर / लेखक

Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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