1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 18, 2026, 2:53:10 PM
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Indian railway : भारत में रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े और व्यस्त रेल सिस्टम में से एक है। हर दिन हजारों ट्रेनें देश के अलग-अलग हिस्सों में चलती हैं और लाखों यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। कहीं बड़े और आधुनिक स्टेशन हैं तो कहीं छोटे और शांत स्टेशन, लेकिन इन सबके बीच कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो अपनी अनोखी तकनीकी वजहों के कारण चर्चा में रहती हैं। ऐसी ही एक दिलचस्प जगह तमिलनाडु के चेन्नई के पास स्थित ताम्बरम रेलवे स्टेशन के आसपास मानी जाती है, जहां से गुजरते समय ट्रेनों की बिजली कुछ पलों के लिए अचानक बंद हो जाती है।
पहली बार इस घटना को देखने वाले यात्रियों को यह किसी रहस्य या तकनीकी खराबी जैसा लग सकता है। जैसे ही लोकल ट्रेन इस खास इलाके से गुजरती है, अचानक बोगियों की लाइटें बंद हो जाती हैं और पंखे भी कुछ सेकंड के लिए रुक जाते हैं। पूरा डिब्बा एक पल के लिए अंधेरे में डूब जाता है, जिससे यात्रियों में हलचल और आश्चर्य दोनों देखने को मिलता है। हालांकि यह स्थिति सभी ट्रेनों में नहीं होती, बल्कि खासतौर पर लोकल इलेक्ट्रिक ट्रेनों में ही इसका अनुभव किया जाता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह कोई खराबी है या फिर इसके पीछे कोई तकनीकी कारण है? असल में इसके पीछे एक पूरी तरह वैज्ञानिक और नियोजित सिस्टम काम करता है। भारतीय रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन (OHE) व्यवस्था के तहत ट्रेनों को बिजली अलग-अलग सेक्शन में सप्लाई की जाती है। इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी दूरी के ट्रैक को कई इलेक्ट्रिक जोन में बांटा गया है।
जब कोई लोकल ट्रेन एक इलेक्ट्रिक सेक्शन से दूसरे सेक्शन में प्रवेश करती है, तो बीच में एक छोटा-सा “न्यूट्रल सेक्शन” आता है। इस न्यूट्रल सेक्शन में कुछ समय के लिए बिजली सप्लाई नहीं होती। इसी कारण ट्रेन को वहां से गुजरते समय कुछ सेकंड के लिए पावर कट का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि ट्रेन की लाइटें और पंखे अचानक बंद हो जाते हैं।
हालांकि यह स्थिति बहुत ही कम समय के लिए होती है और ट्रेन की सुरक्षा या संचालन पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। ट्रेन तुरंत ही अगले पावर सेक्शन से बिजली प्राप्त कर लेती है और सामान्य रूप से आगे बढ़ जाती है। रेलवे ने इस सिस्टम को पूरी सुरक्षा के साथ डिजाइन किया है ताकि अलग-अलग बिजली क्षेत्रों के बीच ट्रेनों का संचालन बिना किसी तकनीकी खतरे के हो सके।
अब बात करते हैं कि ऐसा अनुभव एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में क्यों नहीं देखने को मिलता। इसका कारण यह है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में पावर मैनेजमेंट सिस्टम ज्यादा एडवांस होता है। ये ट्रेनें सेक्शन बदलते समय अपनी पावर सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज कर लेती हैं, जिससे यात्रियों को लाइट बंद होने जैसा अनुभव नहीं होता या बहुत कम महसूस होता है।
वहीं लोकल ट्रेनें पूरी तरह से ओवरहेड इलेक्ट्रिक सप्लाई पर निर्भर होती हैं, इसलिए जब वे न्यूट्रल सेक्शन से गुजरती हैं, तो कुछ सेकंड का पावर गैप स्पष्ट रूप से महसूस होता है। पहली बार इस अनुभव को देखने वाले यात्रियों को यह थोड़ा डरावना लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह रेलवे की एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है।
कुल मिलाकर, ताम्बरम रेलवे स्टेशन के पास होने वाली यह घटना कोई रहस्य या गड़बड़ी नहीं बल्कि भारतीय रेलवे की तकनीकी व्यवस्था का हिस्सा है। यह सिस्टम ट्रेनों को अलग-अलग इलेक्ट्रिक जोन में सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए बनाया गया है। इसलिए अगली बार जब आप इस तरह के किसी सेक्शन से गुजरें और अचानक कुछ सेकंड के लिए अंधेरा हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है, यह केवल रेलवे की एक स्मार्ट इंजीनियरिंग प्रक्रिया है।