Indian Railways: भारतीय रेलवे 'एक देश, एक रेलवे, एक पहचान पत्र' की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने जा रही है। रेलवे बोर्ड ने सभी रेल अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेका कर्मचारियों के लिए एक समान यूनिफ़ॉर्म पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है। नए पहचान पत्र में 12 अंकों का यूनिक आइडेंटिटी कोड (UIC) होगा, जो कर्मचारी की पूरी प्रोफ़ाइल को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करेगा और पहचान में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
रेलवे बोर्ड ने समस्त जोनल रेलवे, प्रोडक्शन यूनिट्स और संस्थानों के महाप्रबंधकों को इसकी गाइडलाइन जारी कर दी है। यूनिक आइडेंटिटी कोड के पहले दो अंक कार्ड जारी होने वाले वर्ष को दर्शाएंगे। उदाहरण के लिए, 2025 में जारी कार्ड '25' से शुरू होगा। अगले दो अंक संबंधित रेलवे जोन या यूनिट कोड के लिए आरक्षित होंगे, जैसे उत्तर मध्य रेलवे के लिए '09' और दक्षिण रेलवे के लिए '10'।
इसके अलावा, पांचवें और छठे अंक कर्मचारी के डिवीजन, वर्कशॉप या मुख्यालय की जानकारी देंगे, जबकि अंतिम छह अंक कर्मचारी का व्यक्तिगत सीरियल नंबर होंगे। इस संरचना से केवल नंबर देखकर ही कर्मचारी की सटीक तैनाती और विभाग की जानकारी पता लगाना संभव होगा।
वर्तमान में विभिन्न जोन अलग-अलग रंग, आकार और डिजाइन के आईडी कार्ड जारी करते हैं, जिससे पहचान में एकरूपता की कमी थी। नई योजना के तहत, पूरे देश में सभी रेलकर्मियों के पहचान पत्र एक डिजाइन, एक रंग और एक प्रारूप में होंगे। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलकर्मियों का पीला और ठेका कर्मचारियों का नारंगी पहचान पत्र होगा। इन कार्ड्स का आकार 8.75 सेमी लंबा और 5.4 सेमी चौड़ा होगा।
पहचान पत्र के पीछे क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करने पर कर्मचारी की पूरी जानकारी, जैसे नाम, पद, विभाग, तैनाती स्थान और कार्य इतिहास, डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि कर्मचारियों की प्रबंधन प्रक्रिया और तैनाती का रिकॉर्ड भी डिजिटल और पारदर्शी तरीके से रखी जा सकेगी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से कर्मचारियों की सुरक्षा, ट्रैकिंग और प्रमाणीकरण आसान होगा। भविष्य में यह पहचान पत्र रेलवे की अन्य सेवाओं और डिजिटल सिस्टम से भी जुड़ा जा सकेगा, जिससे कर्मचारी और प्रशासन दोनों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी।





