Census Of India: देश में होने वाली जनगणना को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और 17 अप्रैल से इसका पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास रहने वाली है, क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। यानी अब कागज-कलम के बजाय मोबाइल ऐप और तकनीक के जरिए हर घर की जानकारी जुटाई जाएगी। इससे न सिर्फ प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी पहले से बेहतर रहने की उम्मीद है।
इस अभियान को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण 17 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा, जिसमें मकानों की गणना और सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। इस दौरान लोग चाहें तो खुद भी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद दूसरा चरण 2 मई से 31 मई तक चलेगा, जिसमें अधिकारी घर-घर जाकर लोगों से सीधे जानकारी इकट्ठा करेंगे।
जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सवालों को इस तरह तैयार किया गया है कि किसी भी परिवार की पूरी सामाजिक, आर्थिक और रहन-सहन से जुड़ी तस्वीर सामने आ सके। अधिकारियों द्वारा परिवार की संरचना से जुड़े कई सवाल पूछे जाएंगे, जैसे—घर में कुल कितने लोग रहते हैं, परिवार का मुखिया कौन है, मकान खुद का है या किराए का, घर में कितने कमरे हैं और कितने विवाहित जोड़े एक साथ रहते हैं। इन सवालों के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि किसी परिवार की रहने की स्थिति कैसी है और उनके जीवन स्तर में क्या बदलाव जरूरी हैं।
इसके साथ ही घर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। इसमें यह जाना जाएगा कि पीने का पानी कहां से आता है और क्या वह घर के अंदर उपलब्ध है या नहीं। बिजली की व्यवस्था कैसी है, शौचालय है या नहीं और अगर है तो उसका प्रकार क्या है, गंदे पानी की निकासी कैसे होती है, नहाने और रसोई की सुविधा उपलब्ध है या नहीं—ऐसे कई सवाल शामिल होंगे। इसके अलावा खाना बनाने के लिए किस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है और क्या एलपीजी कनेक्शन मौजूद है, यह भी पूछा जाएगा।
जनगणना के इस विस्तृत डेटा का उपयोग आने वाले समय में विकास योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। किसी इलाके में यदि बच्चों की संख्या अधिक पाई जाती है, तो वहां स्कूल और पार्क जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। वहीं जिन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी होगी, वहां सरकार की योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी।
इस बार की जनगणना में जियो टैगिंग और डिजिटल मैपिंग का भी सहारा लिया जाएगा, जिससे हर घर और क्षेत्र की सटीक लोकेशन दर्ज की जा सकेगी। इससे न सिर्फ सरकारी योजनाओं को सही जगह तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, बल्कि आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी तेज और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
अधिकारियों को इस कार्य के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि वे लोगों से सही तरीके से जानकारी जुटा सकें और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके। अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों और शिक्षकों को भी इस अभियान में लगाया जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनगणना का काम तय समय सीमा के भीतर पूरा हो।





