Patna: बिहटा के आईआईटी कैंपस में प्राइवेट स्कूल का विवाद गहरा गया है. आईआईटी प्रशासन और फाउंडेशन एकेडमी के बीच विवाद लगातार बढ़ते जा रहा है. आईआईटी के कुलसचिव प्रो. एके ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि आईआईटी पटना और विवाश्वन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के बीच 33 साल के समझौते को लेकर किया गया दावा न केवल झूठा, तथ्यों को छिपाने वाला और गुमराह करने वाला है। बल्कि उस स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के साथ एक धोखा भी है।
कुल सचिव ने प्रिंसिपल के दावे को किया खारिज
कुलसचिव ने कहा कि फाउंडेशन एकेडमी की प्रिंसिपल आभा कुमारी द्वारा किया दावा पूरी तरह से गलत है। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्रालय ने 11 फरवरी 2020 को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि यह समझौता नियमों के अनुरूप नहीं है। इसे शुरू से ही अमान्य माना जाएगा। मंत्रालय ने आईआईटी पटना के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष को संबोधित पत्र में कहा है कि 10 फरवरी 2016 को विवस्वान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के साथ स्कूल संचालन के लिए किया गया करार उस समय की वैधानिक व्यवस्था के खिलाफ था।
पूर्व निदेशक और पूर्व कुलसचिव का निजी स्वार्थ था...
आईआईटी के वर्तमान कुलसचिव का कहना है कि उस समय आईआईटी पटना, अपने मेंटर संस्थान आईआईटी गुवाहाटी के नियमों का पालन कर रहा था, जिसके अनुसार संस्थान की ओर से किसी भी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का अधिकार निदेशक को होता है, न कि कुलसचिव को। आईआईटी पटना के पूर्व निदेशक और कुलसचिव ने शायद अपने निजी स्वार्थों के चलते इस पत्र को फ़ाइल में छिपाकर रखा था। यह पत्र हाल ही में संस्थान के प्रशासन के संज्ञान में आया है, और अब इस मामले में जांच शुरू होने की संभावना है।
कुलसचिव द्वारा करार किया जाना नियमों का उल्लंघन- आईआईटी पटना
पत्र में कहा गया है कि इस मामले में कुलसचिव द्वारा करार किया जाना नियमों का उल्लंघन है, इसलिए यह अनुबंध स्वतः निरस्त माना जाएगा। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि बाद में बने आईआईटी पटना के अपने नियमों में भी अनुबंध करने का अधिकार निदेशक को ही दिया गया है। मंत्रालय ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आईआईटी पटना प्रशासन से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है और पूछा है कि नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ।


