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Chenab Bridge Story: चिनाब ब्रिज की नींव में बसी है इस प्रोफेसर की 17 साल की मेहनत

Chenab Bridge Story: चिनाब ब्रिज के निर्माण में प्रो. जी. माधवी लता का अहम योगदान है। जानें कैसे इस रॉक इंजीनियरिंग विशेषज्ञ ने 17 साल की मेहनत से दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज के सपने को किया हकीकत में तब्दील।

Chenab Bridge Story
प्रो. जी. माधवी लता
© Google
Deepak KumarDeepak Kumar|
|AMP
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Chenab Bridge Story: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे सेतु चिनाब ब्रिज भारतीय इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना है। 6 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित इस 1,315 मीटर लंबे और 359 मीटर ऊंचे पुल ने न केवल तकनीकी दुनिया में भारत का परचम लहराया बल्कि एक महिला इंजीनियर की 17 साल की मेहनत को भी इसने दुनिया के सामने लाने का काम किया है। भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु की प्रोफेसर जी. माधवी लता ने इस प्रोजेक्ट में अपनी रॉक और जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता से इस ऐतिहासिक संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


माधवी लता का सफर अपने आप में बेहद प्रेरणादायक है। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन पारिवारिक समर्थन की कमी के कारण वह इंजीनियरिंग की ओर मुड़ीं। आईआईटी मद्रास से सिविल इंजीनियरिंग में पीएचडी और आईआईएससी में पोस्टडॉक्टरल रिसर्च के बाद उन्होंने 2003 में आईआईएससी जॉइन किया।


शुरू से उनकी रुचि मिट्टी के सुदृढ़ीकरण और शियर मैकेनिज्म में थी, जिसका उपयोग उन्होंने चिनाब ब्रिज की नींव और ढलानों को मजबूत करने में किया है। ठेकेदार कंपनी एफकॉन्स के साथ मिलकर इन्होंने भूकंप संवेदनशील क्षेत्र में 220 किमी/घंटा की हवाओं को झेलने वाली नींव डिजाइन की है। जो इस ब्रिज की स्थिरता का आधार बनी। चिनाब ब्रिज का निर्माण 2005 में शुरू हुआ था और 2022 में पूर्ण हुआ। जिसमें माधवी लता ने 17 साल तक साइट सर्वे, डिजाइन और स्थिरता विश्लेषण में योगदान दिया।


उन्होंने इमेज-बेस्ड तकनीकों के जरिए भू-सिंथेटिक्स की सतह पर सूक्ष्म बदलावों का अध्ययन किया और रॉक मैकेनिक्स के क्षेत्र में संख्यात्मक मॉडलिंग के जरिए ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित की। इस प्रोजेक्ट की चुनौतियां असाधारण थीं। खड़ी ढलानें, भूकंपीय जोखिम और पहुंच की कठिनाई... लेकिन माधवी की दूरदृष्टि और धैर्य ने इनका समाधान सफलतापूर्वक निकाला। उनकी अगुवाई में बनी नींव और ढलान स्थिरीकरण प्रणाली ने इस ब्रिज को 120 साल तक टिकने की क्षमता दे दी है।


1,486 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह ब्रिज एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा है। यह पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक का हिस्सा है। यह कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। जिससे कटरा से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन मात्र 3 घंटे में पहुंच सकेगी। माधवी लता की कहानी न केवल इंजीनियरिंग की दुनिया में नारी शक्ति का प्रतीक है बल्कि यह साबित भी करती है कि दृढ़ संकल्प और तकनीकी कौशल से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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Deepak Kumar

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Deepak Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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