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केंद्र सरकार ने 16 दवाओं पर लगाया बैन, एंटीबायोटिक से लेकर डायबिटीज तक की दवाएं शामिल

Indian Drug Ban: केंद्र सरकार ने मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें एंटीबायोटिक, पेट दर्द और डायबिटीज से जुड़ी दवाओं के संयोजन शामिल हैं, जिनके वैज्ञानिक लाभ साबित नहीं पाए गए।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 20, 2026, 3:43:22 PM

Indian Drug Ban

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Indian Drug Ban: केंद्र सरकार ने मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें एंटीबायोटिक, पेट दर्द, डायबिटीज और कुछ त्वचा व कॉस्मेटिक संबंधी दवाओं के संयोजन शामिल हैं।


सरकार ने यह कार्रवाई ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत की है। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय विशेषज्ञ समिति, ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) और उसकी उप-समिति की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है।


जांच में पाया गया कि इन दवा संयोजनों का कोई ठोस चिकित्सीय आधार नहीं है और इनके लाभों को साबित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। यह समीक्षा प्रक्रिया वर्ष 2021 में शुरू हुई थी, जिसमें वैज्ञानिक अध्ययन और मेडिकल डेटा का विश्लेषण किया गया। दवा कंपनियों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन विशेषज्ञ समिति उनके तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई। इसके बाद दिसंबर 2024 में उप-समिति ने सभी 16 कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।


प्रतिबंधित दवाओं में Amoxicillin + Serratiopeptidase, Cefuroxime + Serratiopeptidase, Cefadroxyl + Probenecid जैसे एंटीबायोटिक कॉम्बिनेशन शामिल हैं। इसके अलावा Dicyclomine + Paracetamol + Clidinium Bromide जैसी पेट दर्द और ऐंठन की दवाएं तथा Gliclazide + Chromium Picolinate जैसी डायबिटीज दवाएं भी प्रतिबंधित सूची में हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि इन संयोजनों में शामिल कुछ तत्वों का एक साथ उपयोग करने का कोई स्पष्ट चिकित्सीय लाभ नहीं पाया गया है। विशेष रूप से Chromium Picolinate का उपयोग मानक डायबिटीज उपचार दिशानिर्देशों में अनुशंसित नहीं है।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि दवाओं का उपयोग केवल वैज्ञानिक प्रमाण और चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर ही होना चाहिए। ऐसे संयोजन जो मरीजों को अतिरिक्त लाभ नहीं देते और संभावित जोखिम बढ़ाते हैं, उन्हें बाजार में अनुमति नहीं दी जा सकती। इस फैसले को दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता और मरीज सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।