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बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गाय कुर्बानी का हिस्सा नहीं; याचिका खारिज

Calcutta High Court: बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि पर रोक बरकरार रखी।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated May 21, 2026, 8:46:10 PM

Calcutta High Court

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Calcutta High Court: बकरीद से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने पशु बलि को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें बकरीद के दौरान पशु वध और बलि पर सख्त नियम लागू किए गए हैं।


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि गाय की कुर्बानी इस्लाम या बकरीद का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। अदालत ने माना कि राज्य सरकार जनहित और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पशु बलि को सीमित करने का अधिकार रखती है। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार को अन्य पशुओं की कुर्बानी के लिए छूट पर विचार करने का निर्देश भी दिया।


अदालत ने खुले या सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की कुर्बानी और वध पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पशु बलि केवल निर्धारित और सुरक्षित स्थानों पर ही की जा सकती है। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने त्योहारों के दौरान पशु वध को लेकर सख्त नियम लागू किए थे। इसके तहत पशु वध से पहले मेडिकल जांच और अधिकारियों से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य किया गया है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट वाले पशुओं की बलि पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।


कोर्ट ने मंदिरों में होने वाली सामूहिक पशु बलि, जैसे काली पूजा के दौरान दी जाने वाली बलि पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करने वाली याचिकाएं भी खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं पर पूरी तरह बैन नहीं लगाया जा सकता और इसे देश को पूरी तरह शाकाहारी बनाने के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।


याचिकाकर्ताओं ने पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत त्योहारों के लिए विशेष छूट की मांग की थी। वहीं राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि जारी नोटिफिकेशन कानून के अनुरूप है। सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।