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पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू, जानिए.. कौन से फैसले नहीं ले सकती सरकार?

Assembly elections 2026: 2026 के विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। इसके बाद सरकार नई योजनाओं की घोषणा, तबादले और बड़े नीतिगत फैसले नहीं ले सकती।

Assembly elections 2026
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव
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Mukesh Srivastava
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Assembly elections 2026: साल 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव आयोग ने मतदान कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आचार संहिता लागू होते ही सत्ताधारी राज्य सरकारों की कई शक्तियां सीमित हो जाती हैं, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें।


आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार किसी भी नई कल्याणकारी योजना, विकास परियोजना या वित्तीय अनुदान की घोषणा नहीं कर सकती। भले ही किसी योजना पर पहले से चर्चा चल रही हो, लेकिन चुनाव के दौरान उसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की जा सकती। चुनाव आयोग यह पाबंदी इसलिए लगाता है ताकि सत्ताधारी दल आखिरी समय में नई घोषणाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित न कर सकें।


इसके अलावा मंत्रियों और सरकारी नेताओं को किसी भी सार्वजनिक परियोजना का शिलान्यास या उद्घाटन करने की अनुमति नहीं होती। यह नियम नई परियोजनाओं के साथ-साथ उन परियोजनाओं पर भी लागू होता है जो पूरी हो चुकी हों, लेकिन उनका औपचारिक उद्घाटन बाकी हो। ऐसे समारोह को अक्सर राजनीतिक प्रचार के रूप में देखा जाता है।


आचार संहिता के दौरान राज्य सरकार प्रशासनिक अधिकारियों का मनमाने तरीके से तबादला भी नहीं कर सकती। पुलिस प्रमुख, जिलाधिकारी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी होती है। साथ ही नई सरकारी नियुक्तियों पर भी रोक लग जाती है।


नीतिगत फैसलों पर भी बड़ी पाबंदी होती है। सरकार ऐसे बड़े निर्णय नहीं ले सकती जो चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करें या राजनीतिक माहौल बदल दें। इसमें बड़े वित्तीय पैकेज, नई नीतियां या बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी देना शामिल है।


सरकारी उपलब्धियों के प्रचार पर भी रोक रहती है। सार्वजनिक पैसे से चलने वाले विज्ञापन, पोस्टर, होर्डिंग या प्रचार सामग्री जिनमें सत्ताधारी सरकार या नेताओं की उपलब्धियों का प्रचार हो, उन्हें हटाना पड़ता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल चुनावी प्रचार के लिए न हो।


हालांकि इन पाबंदियों के बावजूद सरकार का काम पूरी तरह से नहीं रुकता। रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य और पहले से चल रही विकास परियोजनाएं जारी रह सकती हैं। आपदा राहत, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य जरूरी सरकारी सेवाएं भी पहले की तरह संचालित होती रहती हैं।


आचार संहिता कानूनी रूप से सरकार के अधिकार खत्म नहीं करती, लेकिन उसके काम करने की स्वतंत्रता को काफी हद तक सीमित कर देती है। इस दौरान सरकार एक तरह से कार्यवाहक भूमिका में रहती है और केवल नियमित प्रशासनिक कार्यों को ही आगे बढ़ाती है, ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सकें।

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रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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