Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दो चरणों की रिकॉर्ड वोटिंग के बाद अब मतगणना की घड़ी नजदीक आ गई है। तमाम एग्जिट पोल्स में इस बार एनडीए को बंपर जीत मिलती दिख रही है। सर्वे एजेंसियों के अनुमानों के मुताबिक, एनडीए गठबंधन 150 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है। अगर यह अनुमान सच साबित होते हैं तो महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव के साथ-साथ जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) के लिए भी बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो जाएगा।
दरअसल, चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने इस चुनाव के दौरान कई बार यह दावा किया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को 25 से अधिक सीटें नहीं मिलेंगी। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद अपनी राजनीतिक साख दांव पर लगाते हुए कहा था कि अगर जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें मिलती हैं तो वह राजनीति छोड़ देंगे। पीके ने कई टीवी इंटरव्यू और जनसभाओं में दोहराया—“लिखकर ले लीजिए, जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी। अगर आ गईं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।”
अब जबकि लगभग सभी एग्जिट पोल्स में जेडीयू को 50 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, ऐसे में प्रशांत किशोर के दावे पर सबकी नजरें टिक गई हैं। एक्सिस माय इंडिया के सर्वे के अनुसार, एनडीए को 121 से 141 सीटें मिलने का अनुमान है, जिसमें जेडीयू को अकेले 56 से 62 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, महागठबंधन को 98 से 118 सीटों का अनुमान जताया गया है।
अगर सर्वे के नतीजे वास्तविक परिणामों के करीब रहे, तो प्रशांत किशोर के लिए अपनी कही बात पर कायम रहना बड़ी चुनौती होगी। यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने इतनी स्पष्ट भविष्यवाणी की हो, लेकिन इस बार उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को ही दांव पर लगा दिया। इंटरव्यू में पीके ने कहा था—“एनडीए की सरकार बिल्कुल नहीं आ रही है। नीतीश कुमार नवंबर के बाद मुख्यमंत्री नहीं होंगे। जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। अगर आईं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।”
अब सवाल यह है कि 14 नवंबर को आने वाले नतीजों के बाद प्रशांत किशोर अपने वादे पर कायम रहेंगे या फिर कोई नया तर्क देकर यू-टर्न लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर जेडीयू को सर्वे के अनुसार 50 से अधिक सीटें मिलती हैं, तो पीके की साख को बड़ा झटका लगेगा। उनके विरोधी पहले ही यह कहना शुरू कर चुके हैं कि “पीके अब अपनी शर्त से पीछे हटेंगे।”
बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर हमेशा से एक “ट्रेंडसेटर” माने गए हैं—नीतीश कुमार से लेकर नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी तक, कई नेताओं की जीत की रणनीति उन्होंने बनाई। लेकिन इस बार दांव उनके खुद के भविष्य पर है। नतीजे चाहे जो हों, बिहार की सियासत में 14 नवंबर का दिन प्रशांत किशोर की साख की परीक्षा का दिन साबित होगा।






