Nitish Kumar Pension : बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। लगातार दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार आज भी खुद को बेहद प्रासंगिक बनाए हुए हैं। इसी वजह से लोगों के बीच उनकी सैलरी, राजनीतिक सफर और खासकर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर काफी चर्चा रहती है। आइए जानते हैं कि जब नीतीश कुमार राजनीति से संन्यास लेंगे, तो उन्हें हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।
क्या 10 बार सीएम बनने से पेंशन बढ़ती है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई अलग पेंशन निर्धारित नहीं है। यानी कोई नेता चाहे जितनी बार मुख्यमंत्री बने, उसे इसके आधार पर अतिरिक्त पेंशन नहीं मिलती। नेताओं को पेंशन उनकी विधायकी (MLA/MLC) या सांसदी (MP) के कार्यकाल के आधार पर दी जाती है। इस लिहाज से नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक सफर उनकी पेंशन को काफी बढ़ा देता है।
सांसदी की पेंशन कितनी?
नीतीश कुमार लंबे समय तक सांसद रहे हैं। सांसदों के लिए न्यूनतम पेंशन 31 हजार रुपये प्रति माह है, जो हर वर्ष 2,500 रुपये की दर से बढ़ाई जाती है। इस तरह अनुमान लगाया जाए तो नीतीश कुमार की सांसदी पेंशन आज की तारीख में लगभग 65 हजार रुपये से ज्यादा बैठती है।
विधायकी/एमएलसी की पेंशन का गणित
नीतीश कुमार वर्ष 2005 से लगातार बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और अधिकतर बार एमएलसी के रूप में विधान परिषद से मुख्यमंत्री बने। कुल मिलाकर उन्होंने करीब 40 वर्षों तक विधायक या एमएलसी के तौर पर कार्य किया है।
बिहार में विधायक/एमएलसी की न्यूनतम पेंशन 45 हजार रुपये प्रति माह तय है। यह राशि हर वर्ष करीब 4,000 रुपये बढ़ जाती है। लंबे कार्यकाल के कारण नीतीश कुमार की विधायकी/एमएलसी पेंशन आज के समय में दो लाख रुपये से भी अधिक हो चुकी है।
कुल पेंशन कितनी?
जब सांसदी और विधायकी दोनों पेंशन को मिलाकर देखा जाता है, तो नीतीश कुमार की अनुमानित कुल पेंशन लगभग ढाई लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती है। यह राशि उनकी मौजूदा सीएम सैलरी के लगभग बराबर या उससे भी अधिक हो सकती है।
सीएम रहते कितनी सैलरी मिलती है?
नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री रहते हर महीने करीब 2 लाख 15 हजार रुपये का वेतन मिलता है। इसके अलावा उन्हें सुरक्षा, बंगला, स्टाफ, यात्रा, मेडिकल जैसी कई सुविधाएँ भी उपलब्ध रहती हैं। कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव और वर्षों की विधायकी-सांसदी के कारण उन्हें रिटायरमेंट के बाद मोटी पेंशन मिलेगी। अनुमान के अनुसार, उन्हें हर महीने 2.5 लाख रुपये तक की पेंशन मिल सकती है। यानि राजनीतिक करियर खत्म होने के बाद भी उनकी आमदनी स्थिर और काफी बेहतर रहेगी।






