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Lakhsarai Assembly Election : रिजल्ट से पहले सुबह -सुबह माता महारानी के दरबार में पहुंचे विजय कुमार सिन्हा, लखीसराय सीट पर हैं कांटे की टक्कर

लखीसराय विधानसभा में चुनावी जंग बेहद रोमांचक है। काउंटिंग से पहले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा माता महारानी के दरबार पहुंचे, जबकि कांग्रेस के अमरीश कुमार कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

Lakhsarai Assembly Election : रिजल्ट से पहले सुबह -सुबह माता महारानी के दरबार में पहुंचे विजय कुमार सिन्हा, लखीसराय सीट पर हैं कांटे की टक्कर
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Lakhsarai Assembly result : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना आज सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है और पूरे राज्य की तरह लखीसराय विधानसभा सीट पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और रोमांचक बताया जा रहा है, क्योंकि यहां राजनीति के दो बड़े चेहरे आमने-सामने हैं। एक तरफ भाजपा के सिंबल पर सूबे के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा चुनाव मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने युवा और सक्रिय चेहरा अमरेश कुमार को उतारकर मुकाबले को और अधिक तीखा बना दिया है। दोनों उम्मीदवारों के बीच पिछले कई दिनों से जारी आरोप-प्रत्यारोप और जनसंपर्क अभियान ने इस सीट को राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल कर दिया है।


काउंटिंग से पहले मां महारानी के दरबार में पहुंचे विजय सिन्हा

मतों की गिनती शुरू होने से ठीक पहले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा माता महारानी के दरबार पहुंचे। चुनावी तनाव और राजनीतिक दबाव के माहौल के बीच उनका यह कदम न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जा रहा है, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। विजय सिन्हा ने पूजा-अर्चना कर माता महारानी से प्रदेश में स्थिर सरकार और लखीसराय में अपनी जीत की कामना की।


स्थानीय लोगों का कहना है कि विजय सिन्हा बचपन से ही माता महारानी के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं और हर बड़े फैसले से पहले वह यहां दर्शन के लिए अवश्य आते हैं। काउंटिंग जैसे बड़े दिन पर उनका यह पहुंचना समर्थकों में उत्साह भर रहा है और इसे "शुभ संकेत" बताया जा रहा है।


लखीसराय सीट क्यों है खास?

लखीसराय विधानसभा हमेशा से राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती रही है। यहां जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे, विकास के दावे और राजनीतिक व्यक्तित्वों की पकड़ चुनाव के नतीजों को प्रभावित करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में कई काम हुए हैं, जिनका श्रेय एनडीए सरकार और खासकर विजय कुमार सिन्हा को दिया जाता है।


हालांकि विपक्ष का आरोप है कि ये काम अधूरे हैं और जनता से किए गए वादों का बड़ा हिस्सा अब भी कागजों में ही बंद है। कांग्रेस प्रत्याशी अमरीश कुमार ने लगातार जनता के बीच जाकर रोजगार, कृषि समस्याओं और स्थानीय युवाओं के पलायन के मुद्दे को चुनाव में प्रमुखता से उठाया। इसी वजह से यहां का मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।


क्या हैं दोनों उम्मीदवारों के प्रमुख मुद्दे?


विजय कुमार सिन्हा (भाजपा):


विकास कार्यों का हवाला


रोजगार के लिए नए अवसरों का वादा


कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने का दावा


पार्टी के मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क पर भरोसा


उपमुख्यमंत्री पद की दमदार स्थिति से जनता में विश्वास



अमरेश  कुमार (कांग्रेस):

बेरोजगारी और किसानों की समस्या मुख्य मुद्दा

युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर उद्योग और अवसर

सरकार पर अधूरे विकास योजनाओं के आरोप

जनसंपर्क अभियान में सरल और नए नेतृत्व का चेहरा

युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों को जोड़ने का प्रयास


माहौल पूरी तरह रोमांचक

चुनाव के दौरान लखीसराय में जितना ज़ोरदार प्रचार देखने को मिला, उतना ही जोश अब मतगणना के दिन भी देखने को मिल रहा है। समर्थक सुबह से ही परिणाम केंद्र के बाहर जुटने लगे हैं। प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। विशेष बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इस सीट को “टॉस वाली सीट” करार दिया था—यानी जीत किसी भी तरफ जा सकती है। इसकी वजह दोनों उम्मीदवारों की पकड़, उनके प्रचार की रणनीति और क्षेत्र के जातीय समीकरण बताए जा रहे हैं।


काउंटिंग के रुझानों पर टिकी निगाहें

सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली मतगणना के पहले ही दौर से संकेत मिलना शुरू हो जाएगा कि जनता का रुझान किस ओर है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि शुरुआती राउंड बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि लखीसराय सीट पर मतदान कई गांवों और नगर क्षेत्रों में अलग-अलग ढंग से हुआ है। फिलहाल, दोनों दलों के कैंप में हलचल तेज है। समर्थकों को भरोसा है कि उनका उम्मीदवार जीत हासिल करेगा। लेकिन सच क्या है, यह कुछ ही घंटों में सामने आ जाएगा।


आस्था और राजनीति का संगम

विजय कुमार सिन्हा का माता महारानी के दरबार में जाना यह बताता है कि चुनाव केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और नेताओं की भावनाओं से भी जुड़ा होता है। कई समर्थकों ने इसे "आस्था का पल" बताया, तो वहीं विरोधी इसे "चुनावी दबाव" से जोड़ रहे हैं। परिस्थितियां चाहे जो हों, लखीसराय का यह मुकाबला न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि राज्य की सत्ता समीकरण को भी प्रभावित करेगा। आज का दिन यह तय करेगा कि जनता विजय सिन्हा के अनुभव और कार्यों पर भरोसा जताती है या फिर अमरीश कुमार जैसे नए चेहरों को अवसर देना चाहती है।

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Tejpratap

रिपोर्टर / लेखक

Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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