बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने प्रचार के हर हथियार का इस्तेमाल किया, लेकिन इस बार का चुनाव प्रचार पूरी तरह हाईटेक और जोश से भरा रहा। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने जहां सबसे ज्यादा 171 जनसभाएं कर प्रचार अभियान में बाज़ी मारी, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने परंपरागत तरीके से जनता से सीधे जुड़ने पर जोर दिया और 84 जनसभाएं कीं। नीतीश कुमार ने इन सभाओं में से 11 स्थलों पर सड़क मार्ग से यात्रा की, जिसके चलते उन्होंने इस चुनाव में एक हजार किलोमीटर से अधिक की सड़क यात्रा की।
इस बार के विधानसभा चुनाव में रोड शो और हेलीकॉप्टर रैलियों का अनोखा संगम देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालू प्रसाद यादव, योगी आदित्यनाथ, और अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं ने भी बिहार की जनता को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा ने इस चुनाव में 12 हेलीकॉप्टर और कई चार्टर विमानों का उपयोग किया, जिससे उसके नेता एक ही दिन में कई जिलों तक पहुंच सके। वहीं, जेडीयू के पास केवल दो हेलीकॉप्टर थे, फिर भी नीतीश कुमार ने ज्यादातर सभाएं ज़मीनी स्तर पर जनता से संवाद करते हुए कीं।
तेजस्वी यादव ने अपने प्रचार में युवाओं, बेरोजगारी, और शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी, खासकर युवाओं में उनके प्रति उत्साह साफ झलकता रहा। वहीं नीतीश कुमार ने विकास कार्यों और अपने “सात निश्चय” योजना को चुनावी हथियार बनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 बड़ी रैलियां कीं और पटना में एक विशाल रोड शो कर चुनावी माहौल गरमा दिया। योगी आदित्यनाथ ने भी बिहार में 34 जनसभाएं कीं, जबकि अखिलेश यादव ने लगभग 12 सभाएं करके सपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
इस बार के चुनाव प्रचार में तकनीकी साधनों का भी खूब इस्तेमाल हुआ — सोशल मीडिया कैंपेन, वर्चुअल रैलियां और डिजिटल विज्ञापन का प्रभाव साफ नजर आया। एक ओर जहां नेता आसमान में उड़ते रहे, वहीं दूसरी ओर जनता ने अपने गांवों और कस्बों में नेताओं से सीधे जुड़कर लोकतंत्र के इस पर्व को और भी जीवंत बना दिया।





