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Bihar Election: बिहार में 50+ सीटों पर लड़ने जा रही कांग्रेस, RJD के साथ बात तय? ओवैसी पर भी हुआ फैसला

Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में RJD और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर सहमति लगभग बन गई है। कांग्रेस को 50-60 सीटें मिलने की संभावना। AIMIM को महागठबंधन में शामिल नहीं किया जाएगा।

Bihar Election
बिहार चुनाव 2025
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Deepak KumarDeepak Kumar|
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Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं और अब महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच बातचीत भी अंतिम चरण में है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 2020 की तरह 70 सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन RJD उसे 50-60 सीटों पर ही रोकने के पक्ष में है। संभावना है कि 58-60 सीटों पर ही सहमति बन जाए। RJD इस बार 135-140 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है ताकि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे और सरकार बनाने की राह आसान हो जाए।


2020 के विधानसभा चुनाव में RJD ने 144 सीटों पर लड़कर 75 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 70 सीटों पर लड़कर केवल 19 सीटें हासिल की थीं। इस बार गठबंधन में मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी और पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी को भी शामिल किया गया है। VIP को अधिकतम 12 सीटें और RLJP को 2-3 सीटें मिलने की संभावना है। इसके अलावा वामपंथी दल (CPI, CPM, CPI-ML) भी 2020 की तुलना में ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका प्रदर्शन पिछले चुनावों में बेहतर रहा था।


उधर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को महागठबंधन में जगह नहीं मिलेगी। RJD ने साफ कर दिया है कि AIMIM की सांप्रदायिक छवि गठबंधन को बिहार के अन्य हिस्सों में नुकसान पहुंचा सकती है। 2020 में AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में इसके चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे। RJD नेताओं का मानना है कि सीमांचल में फायदा होने के बावजूद AIMIM का साथ पूरे राज्य में वोटों के ध्रुवीकरण का खतरा पैदा कर सकता है।


महागठबंधन की रणनीति इस बार सतर्क और संतुलित है। RJD और कांग्रेस दोनों ही 2020 के अनुभव से सबक लेते हुए जीत की संभावना वाली सीटों पर ध्यान दे रहे हैं। वामपंथी दलों की बढ़ती मांग और नए सहयोगियों के शामिल होने से सीट बंटवारे में जटिलता बढ़ी है, लेकिन गठबंधन का लक्ष्य NDA को कड़ी टक्कर देना है। AIMIM के लिए दरवाजे बंद होने से यह स्पष्ट है कि महागठबंधन धार्मिक ध्रुवीकरण से बचकर व्यापक वोट बैंक को साधने की कोशिश में है।

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Deepak Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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