Bihar Assembly Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भोजपुर जिला मतदान के मामले में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। हालत यह है कि इस जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में कहीं भी 55% से अधिक मतदान नहीं हुआ है और शाहपुर व आरा सदर जैसे क्षेत्रों में तो यह 50% से भी नीचे रहा है।
जिला स्तर पर कुल मतदान प्रतिशत 51.85% रहा, यह अन्य जिलों जैसे रोहतास (52.10%), बक्सर (55.50%) और कैमूर (62.76%) से काफी कम है। नजदीकी मुकाबलों में एक-दो प्रतिशत वोट भी परिणाम बदल देते हैं, इसलिए सभी दलों के लिए हर वोट महत्वपूर्ण होता है लेकिन भोजपुर वासियों का इस मामले में प्रदर्शन उत्साहजनक नहीं रहा। आगामी 2025 चुनाव में चुनाव आयोग को मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे ताकि लोकतंत्र की मजबूती सुनिश्चित हो सके।
भोजपुर जिले के सात विधानसभा क्षेत्र संदेश, बड़हरा, आरा सदर, अगिआंव, तरारी, जगदीशपुर और शाहपुर में कुल मतदान 51.85% रहा। पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 53.58% था, जबकि महिलाओं का 49.82%। सबसे कम मतदान शाहपुर में 49.00% रहा, जहां पुरुष 49.67% और महिलाएं 48.20% ही वोट डाल सकीं। आरा सदर में कुल 47.67% मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत मात्र 44.20% था। तरारी में सबसे ज्यादा 55.35% मतदान दर्ज हुआ, लेकिन वह भी 55% से ऊपर नहीं पहुंचा। अगिआंव में 52.08%, संदेश में 52.73%, बड़हरा में 52.45% और जगदीशपुर में 54.16% मतदान हुआ। यह आंकड़े बताते हैं कि जिले में मतदाता जागरूकता की कमी रही, महिलाओं में तो विशेष तौर पर।
शाहाबाद डिवीजन के चार जिलों की तुलना में भोजपुर सबसे पीछे रहा है। रोहतास में कुल 52.10% मतदान हुआ, बक्सर में 55.50% और कैमूर में सबसे ज्यादा 62.76%। कैमूर में पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 64.21% और महिलाओं का 61.20% रहा। बक्सर में पुरुष 59.61% और महिलाएं 53.41% वोट डालीं हैं। रोहतास में पुरुष 55.39% और महिलाएं 48.40%। भोजपुर का कुल 51.85% प्रतिशत इस डिवीजन में सबसे कम है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नाकामी बताया है जबकि NDA ने मतदाता जागरूकता अभियान की कमी पर जोर दिया है।
चुनाव आयोग ने 2020 चुनाव के बाद SVEEP (सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन) कार्यक्रम भी चलाया था लेकिन भोजपुर जैसे जिलों में प्रभाव सीमित रहा। अब 2025 चुनाव में आयोग विशेष अभियान चला सकता है। इनमें शामिल हैं डोर-टू-डोर जागरूकता, महिलाओं के लिए अलग कैंप और युवा मतदाताओं को ढेर सारा प्रोत्साहन इत्यादि। नजदीकी मुकाबलों में मतदान प्रतिशत निर्णायक होता है, इसलिए भोजपुर समेत पूरे बिहार में इसे बढ़ाना काफी जरूरी है। आंकड़े साफ कहते हैं कि इस जिले को अभी लंबा सफर तय करना है।






