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सावधान! गूगल पर नंबर सर्च करना पड़ सकता है भारी, पटना में साइबर अपराधियों ने कारोबारी से ठगे 19.76 लाख

Patna cyber fraud: पटना में साइबर ठगों ने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन सिंह के नाम से फर्जी नंबर बनाकर कारोबारी से 19.76 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने पांच रुपये की ऑनलाइन फीस के बहाने एपीके फाइल डाउनलोड कराकर तीन बैंक खातों से पैसे निकाल लिए।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 14, 2026, 8:40:36 AM

Patna cyber fraud

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो File

Patna cyber fraud: इंटरनेट मीडिया या सर्च इंजन पर किसी फर्म, संस्था या डॉक्टर का संपर्क नंबर खोजते समय सावधानी बरतें, क्योंकि साइबर ठगों ने अब फर्जी नंबर डालकर लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन सिंह के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर एक कारोबारी से 19.76 लाख रुपये ठग लिए।



मीठापुर बी एरिया निवासी कारोबारी राजेश कुमार ने अपनी मां के इलाज के लिए गूगल पर पटना के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन सिंह का मोबाइल नंबर खोजा था। साइबर ठगों ने डॉक्टर के क्लिनिक के पते के साथ अपना मोबाइल नंबर सर्च इंजन पर दर्ज कर रखा था। राजेश ने उसी नंबर पर संपर्क किया, लेकिन वह नंबर असली क्लिनिक का नहीं बल्कि साइबर अपराधियों का था।



ठगों ने खुद को क्लिनिक का कर्मचारी बताते हुए डॉक्टर से अपॉइंटमेंट के लिए पांच रुपये की ऑनलाइन फीस जमा करने को कहा। इसके लिए उन्होंने राजेश के मोबाइल पर एक लिंक भेजा और एपीके फाइल डाउनलोड करने को कहा।



जैसे ही राजेश ने एपीके फाइल इंस्टॉल कर पांच रुपये का भुगतान किया, उनका मोबाइल साइबर अपराधियों के नियंत्रण में चला गया। ठगों ने इस फाइल के जरिए मोबाइल का डेटा और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद उनके बैंक खातों से पैसे निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।



राजेश अपनी मां की बिगड़ती तबीयत के कारण परेशान थे और उन्हें इलाज के लिए कंकड़बाग स्थित डॉ. आरएन सिंह के वास्तविक क्लिनिक ले गए। गंभीर स्थिति को देखते हुए उनकी मां को अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया। राजेश अस्पताल की व्यवस्था और मां की देखभाल में व्यस्त रहे। इसी दौरान साइबर अपराधियों ने उनके तीन अलग-अलग बैंक खातों में सेंध लगा दी। ठगों ने कुल 18 बार में 19.76 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए।



मोबाइल हैक होने के कारण राजेश को बैंक से होने वाले लेनदेन के संदेश समय पर नहीं मिल सके और उन्हें ठगी की जानकारी नहीं हो पाई। बाद में उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।



साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाले लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें। खासकर एपीके फाइल मोबाइल के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। साइबर अपराधी इसके जरिए मोबाइल हैक कर निजी जानकारी और बैंकिंग डिटेल्स चुरा सकते हैं। किसी भी डॉक्टर, संस्था या व्यवसाय का नंबर हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित माध्यम से ही प्राप्त करें।