1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 23, 2026, 6:12:52 PM
DNA रिपोर्ट ने खोला राज - फ़ोटो सोशल मीडिया
DESK: रिश्तों को शर्मसार कर देने और हैरान करने वाला मामला हिमाचल प्रदेश से सामने आया है। जहां एक युवक की बेगुनाही डीएनए रिपोर्ट से साबित हो गयी, जिसके चलते उसे सजा होने से बची नहीं तो वो लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहता। लेकिन हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एक युवक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि जब वैज्ञानिक साक्ष्य किसी आरोपी को पूरी तरह बेगुनाह साबित कर देते हैं, तो उसे अनावश्यक आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
2023 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला बिलासपुर जिले का है। वर्ष 2023 में महिला पुलिस थाने में एक नाबालिग के बयान के आधार पर आयुष नामक युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म), धारा 506 (आपराधिक धमकी) एवं पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 9 मार्च 2023 को आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बाद में पीड़िता गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
DNA जांच से बदला पूरे मामले का रुख
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता, नवजात शिशु और आरोपी के डीएनए नमूने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजे। जांच रिपोर्ट में आरोपी आयुष का डीएनए बच्चे से मेल नहीं खाया। इसके बाद अन्य संभावित व्यक्तियों और लड़की के भाई के डीएनए नमूनों की जांच कराई गई। फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि नवजात का जैविक पिता पीड़िता का सगा भाई है।
पूरक बयान में पीड़िता ने बदला अपना बयान
एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पीड़िता ने पुलिस के समक्ष पूरक बयान दर्ज कराया। उसने अपने नए बयान में स्वीकार किया कि उसके सगे भाई ने ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे।
हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
वैज्ञानिक साक्ष्यों और पीड़िता के पूरक बयान को आधार मानते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की एकल पीठ ने माना कि आरोपी आयुष के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी निर्दोष व्यक्ति को मुकदमे की प्रक्रिया से गुजरने के लिए बाध्य करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से संबंधित एफआईआर को निरस्त कर दिया। इस तरह डीएनए रिपोर्ट ने एक बेकसुर को जेल जाने से बचा लिया। इस घटना से हर कोई हैरान है, इसे रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना मान रहे हैं।