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सुपौल MDM कांड: 100 से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों का हंगामा, जांच में चावल में मिले कीड़े, शिक्षा मंत्री ने मांगी रिपोर्ट

सुपौल के त्रिवेणीगंज स्थित मिडिल स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले में जांच के दौरान चावल में कीड़े मिले। ग्रामीणों ने स्कूल का घेराव कर सभी शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की। शिक्षा मंत्री जांच के आदेश दिये.

1st Bihar Published by: SANT SAROJ Updated Jul 23, 2026, 8:23:34 PM

बिहार न्यूज

शिक्षा मंत्री के संज्ञान के बाद मचा हड़कंप - फ़ोटो रिपोर्टर

SUPAUL: बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के मिरजवा वार्ड 10 स्थित मिडिल स्कूल में बुधवार 22 जुलाई को एमडीएम खाने के बाद 100 से अधिक छात्रों की तबीयत बिगड़ गई थी। इस घटना के अगले दिन गुरुवार 23 जुलाई को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर शिक्षकों को ऑफिस में घंटों घेराव कर रखा और स्कूल में पठन-पाठन के साथ-साथ एमडीएम भी बंद करा दिया। ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे से दोपहर तक स्कूल में मौजूद शिक्षकों को ऑफिस में घेरकर रखा। 


सूचना मिलने पर डीपीओ (एमडीएम) महेश पासवान,जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनीता कुमारी,एमडीएम डीपीएम पंकज कुमार सिंह तथा बीईओ सह बीपीआरओ मनीष कुमार पुलिस बल के साथ स्कूल पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतें विस्तार से सुनीं और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। ग्रामीण अमित कुमार,आशीष कुमार,प्रमोद यादव,रंजन मेहता,सुलेखा देवी,ममता देवी,कुमोद कुमार साह सहित दर्जनों लोगों ने आरोप लगाया कि बुधवार को घटना के बाद शिक्षकों ने अभिभावकों को तत्काल सूचना नहीं दी। इसके बजाय स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया और जिन छात्रों की तबीयत बिगड़ रही थी,उन्हें स्कूल के ऑफिस में लाकर रखा गया। 


ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि एमडीएम तैयार होने के बाद किसी भी शिक्षक ने खाना का स्वाद नहीं चखा और सभी शिक्षक दोपहर का भोजन करने अपने-अपने घर चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि एमडीएम खाने के बाद 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई,लेकिन घटना के बाद किसी भी शिक्षक ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चों को शिक्षकों के भरोसे स्कूल भेजते हैं,लेकिन ऐसी गंभीर घटना होने पर शिक्षकों की जवाबदेही तय नहीं की गई।


 ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक स्कूल में कार्यरत सभी शिक्षकों का ट्रांसफर या सस्पेंशन की कार्रवाई नहीं की जाती,तब तक स्कूल में पठन-पाठन और एमडीएम संचालन बंद रहेगा। उनका कहना है कि अब तक केवल प्रभारी एचएम को निलंबित किया गया है और रसोइया को चयनमुक्त किया गया है,लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि स्कूल के सभी सात-आठ शिक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सभी संबंधित शिक्षकों का स्थानांतरण या निलंबन नहीं किया गया, तो वे आंदोलन तेज करेंगे और विद्यालय का पठन-पाठन व एमडीएम अनिश्चितकाल तक बंद रखेंगे।


घटना की सूचना पर पहुंची अधिकारियों की टीम ने पहले ग्रामीणों की शिकायतें सुनी और उसके बाद स्कूल की समीक्षा किए सभी पंजियों की जांच किए। जांच के क्रम में भंडारण में रखे एमडीएम के चावल में कीड़े मिले। जिसको लेकर ग्रामीण पूर्व मुखिया सुशील कुमार,उमेश कुमार कामेश,उपेंद्र यादव,अनिल मेहता,चंदन साह प्रदीप यादव,डॉ टुनटुन यादव आदि ने कहा कि ग्रामीणों के द्वारा अधिकारियों के सामने ड्राम से चावलों को निकाला गया जिसमें कीड़े मिले हैं इस तरह के चावल बच्चों को खिलाए जाते हैं।


मौके पर पहुंचे डीपीओ (एमडीएम) महेश पासवान और एमडीएम डीपीएम पंकज कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे,उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो,इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। अभिलेखों की जांच में आवश्यक पंजी संधारित नहीं पाए गए। वहीं,मध्याह्न भोजन परोसने से पहले रसोइया या स्कूल शिक्षा समिति के सदस्य अथवा शिक्षकों द्वारा भोजन चखने की अनिवार्य प्रक्रिया का भी सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इसके अलावा,भंडारण की जांच के दौरान रखे गए चावल में कीड़े पाए गए। अधिकारियों ने कहा कि सभी बिंदुओं की गहन जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


वहीं बीईओ मनीष कुमार ने बताया कि स्कूल के प्रभारी एचएम अशोक पासवान को सस्पेंड कर दिया गया है निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय राघोपुर कर दिया गया है साथ ही रसोईया को चयनमुक्त कर दिया गया है और बेहतर शिक्षा और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया गया है उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मांग स्कूल के सभी शिक्षकों के तबादले या सस्पेंशन से संबंधित है इस संबंध में जांच कर प्रतिवेदन डीईओ को भेजा जाएगा,वस्तुस्थिति से उन्हें अवगत कराया जाएगा,सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है।


जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनिता कुमारी ने बताया कि ग्रामीणों की मांग है कि बच्चे हमारे अच्छे भोजन करें और इस तरह की अगर घटना घटती है तो उसके लिए सचेत रहें,रसोईया को भी हिदायत दिया गया है कि साफ-सुथरा अच्छी तरीके से रखें,चखना पंजी को संधारित रखें और उसमें अंकित करें कि बना भोजन किस क्वालिटी की है उन्होंने आश्वासन दिया कि स्कूल में कार्यरत जो स्थानीय शिक्षक हैं उन्हें हटाया जाएगा,यहां मैनेजमेंट की कमी है।


वहीं मामला बुधवार को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के संज्ञान में पहुंचते ही विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गई और तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई। सूत्रों के अनुसार,केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की बैठक में भाग लेने दिल्ली गए शिक्षा मंत्री को जैसे ही घटना की जानकारी मिली,उन्होंने तत्काल फोन पर पूरे मामले की जानकारी ली। मंत्री ने बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की और उनकी स्थिति सामान्य होने पर संतोष व्यक्त किया। साथ ही जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बच्चों के समुचित उपचार सुनिश्चित करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराने का निर्देश दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य के सभी स्कूलों में एमडीएम की गुणवत्ता,स्वच्छता एवं सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके अलावा मध्याह्न भोजन योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के विरुद्ध आरोप-पत्र गठित कर विभाग को भेजने का भी निर्देश दिया गया है।


इधर,घटना की संयुक्त जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीईओ संग्राम सिंह ने बुधवार देर रात आदेश जारी करते हुए बताया कि जांच में मध्य विद्यालय मिरजवा के एचएम संजीव कुमार आंख के ऑपरेशन के कारण अवकाश पर थे। स्कूल का दैनिक प्रभार विशिष्ट शिक्षक अशोक कुमार पासवान के पास था और उन्हीं की देखरेख में मध्याह्न भोजन का संचालन किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मध्याह्न भोजन ग्रहण करने के बाद कुछ छात्र-छात्राओं ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की,जिसके बाद उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। 


जांच में प्रथम दृष्टया मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में लापरवाही के लिए विशिष्ट शिक्षक अशोक कुमार पासवान को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया। इसी आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार ने अशोक कुमार पासवान को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय राघोपुर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में नियमानुसार उन्हें मूल विद्यालय के स्थापना से जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी,ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।