Bihar Cyber Crime News: बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। साइबर थाने की पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गेमिंग एप, शेयर ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह 12 राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर लंबे समय से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।
आज के समय में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई से लेकर व्यापार और निवेश तक ज्यादातर काम इंटरनेट के जरिए हो रहे हैं। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। मुजफ्फरपुर में सामने आया यह मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां गेमिंग और ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से बड़ी रकम ठग ली जाती थी।
दो शातिर अपराधी गिरफ्तार
पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वे रामपुरहरि थाना क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। साइबर थाने की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दोनों को पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उनकी तलाशी ली तो कई चौंकाने वाले सबूत सामने आए। पुलिस ने इनके पास से 14 अलग-अलग बैंक खातों से जुड़े डेबिट कार्ड, 11 बैंक खातों की चेकबुक और तीन सादे चेकबुक बरामद किए हैं। इन सादे चेकबुक के सभी पन्नों पर पहले से ही खाताधारकों के हस्ताक्षर किए हुए थे, जिससे ठगी के पैसों को आसानी से निकाला जा सके।
इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों के पास से नौ मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक बैंक पासबुक, एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड और पांच फर्जी कंपनियों की मुहर भी जब्त की है। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों के जरिए यह गिरोह बड़े पैमाने पर साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आर्थिक अपराध इकाई की ओर से चलाए जा रहे “ऑपरेशन साइबर प्रहार” के तहत कई बैंक खातों की जांच की जा रही थी। इसी जांच के दौरान कुछ खातों में करीब 1.18 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला। जब पुलिस ने इन खातों की गहराई से जांच की तो इस साइबर गिरोह का खुलासा हुआ।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि इन लोगों ने देश के 12 राज्यों के करीब 30 लोगों से ठगी की है। हालांकि पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग साइबर ठगी के मामलों में शिकायत दर्ज नहीं कराते हैं।
फर्जी कंपनियां बनाकर करते थे ठगी
जांच में पुलिस को पता चला कि यह गिरोह ग्रामीण इलाकों के लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी गांव के लोगों से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लेते थे। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से फर्जी कंपनियां खोल दी जाती थीं। इतना ही नहीं, इन कंपनियों के लिए जीएसटी नंबर भी ले लिया जाता था ताकि पूरा काम कानूनी दिखे और किसी को शक न हो।
इसके बाद इन फर्जी कंपनियों के बैंक खाते खोले जाते थे और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया जाता था। गिरोह की योजना इतनी सुनियोजित होती थी कि शुरुआती जांच में किसी को इस पर संदेह भी नहीं होता था।
सीतामढ़ी में भी साइबर नेटवर्क का भंडाफोड़
इधर सीतामढ़ी पुलिस ने भी “ऑपरेशन साइबर प्रहार” के तहत साइबर अपराधियों के एक नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में सुप्पी थाना क्षेत्र के मोतीपुर अख्ता गांव के रहने वाले प्रियदर्शी नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक यह आरोपी साइबर ठगों को ‘म्यूल बैंक खाते’ उपलब्ध कराता था। इन खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसों को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस को उसके बैंक खाते से करीब 1.18 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का पता चला है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।






