1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated May 10, 2026, 2:26:33 PM
AI से सांकेतिक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar News: बिहार के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार रूपी बहती गंगा में बढ़िया से हाथ धोए हैं. हाल के वर्षों में करप्शन ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं. शायद ही कोई दफ्तर होगा,जहां बिना रिश्वत काम होता हो. अफसर दोनों हाथों से माल बटोर कर राज्य और राज्य से बाहर संपत्ति अर्जित क र रहे. हवाला के जरिए, माल खपा रहे हैं. आपको जानकर आश्चर्य होगा, बिहार से बाहर की सोसायटी में 90 फीसदी प्लॉट-फ्लैट में राज्य के लुटेरे अफसर पैसे लगा रखे हैं. आर्थिक अपराध इकाई को बड़े ही काम के सबूत हाथ लगे हैं.
आर्थिक अपराध इकाई ने हाल के दिनों में तीन भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन किए हैं. यह ऑपरेशन बिहार से लेकर बंगाल तक किए गए. तीनों अफसर का कनेक्शन बंगाल के सिलीगुड़ी का मिला. इसके बाद ईओयू की आंख खुली है. जांच एजेंसी सिलीगुड़ी में तह तक गई, तब जो जानकारी निकलकर सामने आई है, उससे ईओयू हतप्रभ है. पूरी की पूरी सोसायटी में बिहार के धनकुबेर अफसरों ने पैसा लगा रखा है. ईओयू को काम के सबूत हाथ लगे हैं. पता चला है कि सिलीगुड़ी में एक ऐसी भी सोसायटी है, जहां 90 फीसदी बिहार के लोग हैं. इनमें छोटे से लेकर बड़े स्तर के अधिकारी हैं. बताया जाता है कि इनमें कई आईएएस-आईपीएस अफसर हैं, अपने रिश्तेदारों के नाम पर फार्म हाउस ले रखे हैं. पुलिस,परिवहन,निबंधन, इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अफसरों इंजीनियरों की तो भरमार है.
आर्थिक अपराध इकाई की जांच में पता चला है कि बिहार के भ्रष्ट अफसर रिश्वत के पैसे को सिलीगुड़ी की सोसायटी में नकदी खपा रहे. सोसायटी में प्लॉट की राशि नकद में दी जा रही है. यह पैसा हवाला के जरिए बंगाल तक पहुंच रहा है. जांच एजेंसी को यह भी भनक लगी है कि, पैसा पटना से पूर्णिया पहुंचता है. इसके बाद पूर्णिया से वह खेप सिलीगुड़ी तक डिलीवर की जाती है. फिर वो नकदी सोसायटी डेवलपर्स तक पहुचाई जाती है. इस तरह से बिहार के भ्रष्ट अफसरों का पैसा सिलीगुड़ी तक आराम से पहुंच रहा.
आर्थिक अपराध इकाई अब इस मामले को आयकर विभाग से शेयर करने की तैयारी में है. बताया जाता है कि जिस तरह से हवाला के जरिए पूरा खेल किया जा रहा है, वो बड़ा ही घातक है. आयकर विभाग अगर इस मामले में बिहार से लेकर बंगाल तक तह में जाए, पड़ताल करे तो बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है. जिसमें भ्रष्ट अफसर, दलाल और सिलीगुड़ी में सोसायटी डेवलप करने वाले डेवलपर्स शामिल हैं.
बता दें, आर्थिक अपराध इकाई ने 6 मई को बड़ा ऑपरेशन किया था. सुपौल के भ्रष्ट जिला अवर निबंधक अमरेंद्र कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की. जिसमें पता चला कि सब रजिस्ट्रार ने पत्नी नीता कुमारी के नाम पर सिलीगुड़ी के पास सोसाइटी में लगभग 42 डिसमिल जमीन क्रय किया है. स्थानीय मापी में यह भूखंड करीब 25 कट्ठा है. यह जमीन 15 लाख रुपए प्रति कट्ठा की दर से खरीदी गई है. भूखंड क्रय करने में जिला अवर निबंधन ने चार करोड रुपए खर्च किए हैं. तलाशी के क्रम में इसके साक्ष्य मिले हैं. जमीन का मूल्य नगद राशि में भुगतान किया गया है. इसके साक्ष्य जांच के दौरान आर्थिक अपराध इकाई के हाथ लगे हैं . इसकी बाउंड्री कराने में लगभग 25 लाख रुपए का खर्चा आया है .
इसके पहले आर्थिक अपराध इकाई ने किशनगंज के नगर थाने के तत्कालीन थानेदार के खिलाफ छापेमारी की थी. इसके पहले किशनगंज सदर केएसडीपीओ गौतम कुमार के ठिकानों पर रेड की गई है. दोनों अधिकारियों ने सिलीगुड़ी में संपत्ति खरीदी थी.
आर्थिक अपराध इकाई ने 14 अप्रैल को किशनगंज थाने के थानेदार अभिषेक कुमार रंजन के ठिकानों पर छापेमारी की,तब पता चला इन्होंने भी सिलीगुड़ी में प्लॉट की खरीद की है. यानी सिलीगुड़ी में दार्जिलिंग रोड पर 6 कट्ठा का भूखंड क्रय किया और उसकी बाउंड्री कराई गई है. यह भूखंड 17 लाख रुपए प्रति कट्ठा की दर से खरीदी गई. तलाशी में यह तथ्य सामने आया कि भूखंड क्रय करने में 84 लाख रुपया नगद भुगतान प्रमोटर को किया गया है.
किशनगंज के तत्कालीन डीएसपी गौतम कुमार के ठिकानों पर भी ईओयू ने छापेमारी की थी. ईओयू की शुरुआती जांच में संकेत मिले कि गौतम कुमार ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक बेनामी संपत्ति खरीदी थी. यह खरीद 10 जुलाई 2025 को शगुफ्ता शमीम नाम की व्यक्ति के जरिए कराई गई थी. जांच एजेंसी के मुताबिक यह संपत्ति सिलीगुड़ी के इलाके में स्थित एक दो मंजिला भवन का निबंधन पश्चिम बंगाल के बागडोगरा स्थित रजिस्ट्रेशन ऑफिस में कराया गया था. दस्तावेजों में मालिक के रूप में शगुफ्ता शमीम का नाम दर्ज है, लेकिन EOU को संदेह है कि असली मालिक गौतम कुमार ही हैं.
सिलीगुड़ी स्थित यह दो मंजिला भवन 10.07.2025 को शगुफ्ता शमीम के नाम पर खरीदा गया था. शगुफ्ता शमीम पूर्णिया की लाइन बाजार झंडा चौक की रहने वाली हैं. संपत्ति का रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल के बागडोगरा निबंधन कार्यालय में कराया गया था. EOU की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गौतम कुमार ने अपनी पद का दुरुपयोग कर यह बेनामी संपत्ति अर्जित की.