यदि यह मर्जर सचमुच होता है, तो भारत के डीटीएच सेक्टर में 2016 में डिश टीवी और वीडियोकॉन डी2एच के विलय के बाद यह सबसे बड़ा मर्जर होगा। यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं को एक नई सेवा और प्रतिस्पर्धा का अनुभव करा सकता है।
हालांकि, न तो भारती एयरटेल और न ही टाटा सन्स ने इस मर्जर पर आधिकारिक बयान दिया है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मर्जर की घोषणा कुछ हफ्तों में हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों कंपनियों के बीच महीनों से इस मर्जर पर बातचीत चल रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स ने इस मामले से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें मर्जर की प्रक्रिया और इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
यह मर्जर शेयरों की अदला-बदली के जरिए होगा, जो कि दोनों कंपनियों के लिए एक रणनीतिक कदम हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, एयरटेल के पास इस मर्जर के बाद 52-55% बहुमत हिस्सेदारी होगी, जबकि टाटा सन्स और वॉल्ट डिज्नी सहित टाटा प्ले के अन्य शेयरहोल्डर्स के पास 45-48% हिस्सेदारी रहेगी। इस मर्जर को लेकर यह भी बताया गया है कि यह एक नॉन-बाइंडिंग डील होगी, जिसका मतलब है कि दोनों पक्षों के लिए यह एक प्रारंभिक समझौता हो सकता है, और अंतिम निर्णय आने में कुछ समय लग सकता है।





