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luxury apartments India : भारत में अमीरों की लग्जरी हाउसिंग में दिलचस्पी बढ़ी, बड़े ब्रांडेड प्रोजेक्ट्स की मांग तेज; आप भी खरीदने जा रहे तो समझ लें पूरी बात

भारत में हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स का रियल एस्टेट में निवेश बढ़ रहा है। लग्जरी हाउसिंग की मांग तेज, ब्रांडेड और बड़े साइज के प्रोजेक्ट्स निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

luxury apartments India : भारत में अमीरों की लग्जरी हाउसिंग में दिलचस्पी बढ़ी, बड़े ब्रांडेड प्रोजेक्ट्स की मांग तेज; आप भी खरीदने जा रहे तो समझ लें पूरी बात
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luxury apartments India : भारत में हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNWIs) का रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी से बढ़ता निवेश अब मार्केट के लिए एक बड़ी चुनौती के साथ-साथ अवसर भी बन गया है। देश में बड़े साइज और ब्रांडेड घरों की कमी के कारण अमीर वर्ग अपनी संपत्ति को सही लग्जरी प्रॉपर्टीज में निवेश करने के लिए विकल्प नहीं ढूंढ पा रहा है। यही वजह है कि अगर कोई निवेशक रियल एस्टेट में कदम रखने का सोच रहा है, तो बदलते ट्रेंड को समझना अब जरूरी हो गया है।


हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में HNWI की संख्या 3,78,810 तक पहुँच चुकी है, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं, अल्ट्रा-हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (UHNWIs) की संख्या 4,290 हो चुकी है, जिनकी कुल संपत्ति 534.77 बिलियन डॉलर है। इतने बड़े निवेश आधार के बावजूद रियल एस्टेट सेक्टर सप्लाई के मामले में पीछे चल रहा है। मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि अब बड़े साइज की यूनिट्स की बढ़ती मांग के साथ-साथ ब्रांडेड हाउसिंग, बेहतर मेंटेनेंस और स्टैंडर्ड लाइफस्टाइल जैसे कारण निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।


भारत में रियल एस्टेट डेवलपमेंट साइकिल वर्तमान में 7–8 साल लंबा हो चुका है, जिसका सीधा असर लग्जरी हाउसिंग सप्लाई पर पड़ रहा है। बड़े साइज की यूनिट्स और ब्रांडेड रेजिडेंसी की मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि सप्लाई उसकी रफ्तार पकड़ नहीं पा रही। होमग्राम के फाउंडर गौरव सोबती का कहना है कि भारतीय रियल एस्टेट में आज का खरीदार सिर्फ चार दीवारें नहीं चाहता, बल्कि वह एक ऐसा एसेट चाहता है जो उसकी लाइफस्टाइल, पहचान और इन्वेस्टमेंट गोल, तीनों को साथ लेकर चले।


बड़े साइज के ब्रांडेड रेजिडेंस इसलिए तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि यह सेगमेंट क्वालिटी, प्राइवेसी और स्टैंडर्डाइज्ड सर्विसेज का ऐसा संतुलन प्रदान करता है, जो आम प्रोजेक्ट्स में संभव नहीं है। आने वाले वर्षों में वही डेवलपर्स आगे बढ़ेंगे, जो डिजाइन, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल पार्टनरशिप को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने की क्षमता रखते हैं।


इस ट्रेंड के उदाहरण भी सामने आ चुके हैं। नोएडा में M3M की Jacob Residences के 5BHK (6,400 वर्गफीट) अपार्टमेंट्स 40,000 रुपये प्रति वर्गफुट की दर पर लॉन्च होते ही बिक गए। इसी तरह, गुड़गांव के द्वारका एक्सप्रेसवे पर Elan The Emperor ने 4,500 वर्गफीट से ऊपर वाले इन्वेंट्री की 5,400 करोड़ रुपये की सेल कुछ ही समय में पूरी कर ली। ओबेरॉय रियल्टी का गुरुग्राम में पहला प्रोजेक्ट, जिसमें 5,000–8,000 वर्गफीट की अल्ट्रा-लग्जरी यूनिट्स होंगी, 2026 की पहली तिमाही में मार्केट में दस्तक देगा। ट्रम्प टॉवर और वेस्टिन रेजिडेंसी जैसे ग्लोबल ब्रांड्स के प्रति निवेशकों की उत्सुकता भी इस सेगमेंट की गर्मी को दिखाती है।


आरजी ग्रुप के डायरेक्टर हिमांशु गर्ग ने बताया कि उन्होंने नोएडा स्थित अपने प्रोजेक्ट में जेजे वालाया के साथ मिलकर लिमिटेड-एडिशन टावर लॉन्च किए हैं, जिसमें ग्राहकों के लिए कस्टम-टेलर्ड रेजिडेंस उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य उन खरीदारों को सर्व करना है, जो आउट ऑफ द बॉक्स डिजाइन, सर्विस और क्वालिटी कंस्ट्रक्शन चाहते हैं और खर्च करने को तैयार हैं। मार्केट की प्रतिक्रिया उन्हें ऐसे और प्रोजेक्ट लाने का विश्वास दे रही है।


विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भारतीय लग्जरी हाउसिंग मार्केट तेजी से बढ़ेगा और वही डेवलपर्स इस क्षेत्र में अग्रणी बनेंगे, जो डिजाइन, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सर्विसेज का सही मिश्रण प्रदान कर सकेंगे। ऐसे में, HNWIs और UHNWIs के लिए यह सेक्टर निवेश का एक आकर्षक विकल्प बन चुका है।

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Tejpratap

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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