गूगल पे से यूटिलिटी बिल जैसे गैस सिलेंडर बुकिंग, बिजली बिल भरने, DTH रिचार्ज और फास्टैग रिचार्ज जैसी सेवाओं के लिए पेमेंट करते वक्त उन्हें अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा। यह नया चार्ज 0.5% से लेकर 1% तक होगा, और इसके साथ ही यूजर्स को कन्वीनियंस फीस पर GST भी देना होगा। इस बदलाव के बाद गूगल-पे यूजर्स के लिए लेन-देन की लागत बढ़ने वाली है, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम के उपयोगकर्ता परेशान हो सकते हैं।
पहले 2023 में गूगल-पे ने मोबाइल रिचार्ज पर सर्विस चार्ज लेने का ऐलान किया था, जिसके तहत अब मोबाइल रिचार्ज पर यूजर्स को 3 रुपये तक का अतिरिक्त चार्ज देना होता है। इस बार जो नया शुल्क लागू हुआ है, वह पेमेंट के प्रकार और सर्विस के हिसाब से भिन्न होगा, जिसमें डेबिट या क्रेडिट कार्ड से किए गए पेमेंट पर 0.5% से 1% तक की प्लेटफॉर्म फीस चुकानी पड़ेगी।
बता दें कि जनवरी 2025 में गूगल-पे के जरिए 8.26 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था। हालांकि, इसके बावजूद फोन-पे इस क्षेत्र में अब भी आगे है, जिसने 11.91 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन के साथ सबसे बड़ा बाजार हिस्सा हासिल किया है।
गूगल-पे और अन्य डिजिटल पेमेंट एप्स के लिए यह बदलाव खास अहमियत रखता है, क्योंकि भारत में यूपीआई (UPI) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। फरवरी 2025 में यूपीआई के जरिए 13.92 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जो कि जनवरी 2025 में 23.48 लाख करोड़ रुपये था। इस संख्या में 1% से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल जनवरी के मुकाबले इसमें 39% की बढ़ोतरी हुई है।





