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निर्माण के 60 दिन बाद ही धंसी नई सड़क-पुलिया, घटिया काम और भ्रष्टाचार की खुली पोल

Bihar News: बिहार में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी नई सड़क और पुलिया कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 07, 2026, 7:24:13 PM

निर्माण के 60 दिन बाद ही धंसी नई सड़क-पुलिया, घटिया काम और भ्रष्टाचार की खुली पोल

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Bihar Road Construction Scam: पूर्वी चंपारण जिले में सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. यहां मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनाई गई नई सड़क और पुलिया महज 60 दिनों के भीतर ही टूटने और धंसने लगी है. सड़क के बीचों-बीच बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जबकि पुलिया का एक हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. हालात ऐसे हैं कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को हादसे का डर सताने लगा है.


मामला परसौनी से बोकाने को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग का है. जानकारी के अनुसार शिव मंदिर से रामपुर मनोरथ तक करीब 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया गया था. सड़क बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब आने-जाने में सुविधा होगी, लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क और पुलिया की हालत खराब होने लगी.


ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई है. उनका कहना है कि सड़क और पुलिया बनाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसकी वजह से इतनी जल्दी निर्माण कार्य जवाब दे गया. लोगों का कहना है कि अगर काम सही तरीके से हुआ होता तो सड़क और पुलिया दो महीने में इस हालत में नहीं पहुंचती.


सबसे हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर लगाए गए सरकारी बोर्ड में योजना की लागत की जानकारी तक नहीं दी गई है. इसे लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं. लोगों का कहना है कि जब सरकारी पैसे से काम हुआ है तो खर्च की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए थी.


वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जो पुलिया क्षतिग्रस्त हुई है, वह पहले से बनी हुई थी और नई सड़क निर्माण के दौरान उसकी सिर्फ मरम्मत की गई थी. अधिकारियों के अनुसार भारी वाहनों के गुजरने से पुलिया को नुकसान पहुंचा है.


हालांकि स्थानीय लोग इस तर्क को मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर पुलिया पहले से कमजोर थी तो उसकी जांच कर उसे मजबूत बनाया जाना चाहिए था. बिना पूरी तैयारी के सड़क निर्माण करना और बाद में जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है.


घटना के बाद ग्रामीणों में काफी नाराजगी है. लोगों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन अगर जमीन पर काम की यही स्थिति रही तो योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा. ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.


पूर्वी चम्पारण सोहराब आलम की रिपोर्ट