1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 10, 2026, 9:03:39 AM
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EOU Raid : सरकारी नौकरी... सीमित वेतन... लेकिन रहन-सहन ऐसा कि बड़े-बड़े कारोबारी भी पीछे छूट जाएं! सवाल यही है कि आखिर एक उत्पाद निरीक्षक की कमाई इतनी कैसे बढ़ गई कि करोड़ों की संपत्ति, आलीशान बंगला, लग्जरी गाड़ियां और मोटा निवेश खड़ा हो गया? यही सवाल अब बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) भी पूछ रही है।
सीवान में तैनात उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड़ उर्फ अंकेश राज गोंड़ पर आय से 201 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा है। ईओयू ने उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद पटना, मुंगेर और सीवान में एक साथ पांच ठिकानों पर छापेमारी की। शुरुआती जांच में जो तस्वीर सामने आई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी सरकारी कर्मचारी की आय तय होती है, तो फिर करोड़ों की संपत्ति आखिर कहां से आई? ईओयू के मुताबिक अंकेश गोंड़ ने नौकरी के दौरान तीन प्लॉट और एक मकान खरीदा। सिर्फ मुंगेर में खरीदे गए मकान और व्यावसायिक भूखंड पर ही करीब 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए। हैरानी की बात यह है कि यह रकम उनकी पूरी नौकरी के दौरान मिली कुल सैलरी से भी अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस खरीदारी के लिए किसी बैंक से लोन भी नहीं लिया गया। अब सवाल उठता है कि अगर बैंक से कर्ज नहीं लिया गया, तो फिर करोड़ों रुपये आए कहां से?
ईओयू की टीम जब पटना के दानापुर स्थित आवास पहुंची तो वहां लगभग दो कट्ठा जमीन पर बना तीन मंजिला आलीशान मकान मिला। करीब 7500 वर्गफीट में बने इस भवन की शुरुआती अनुमानित लागत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। हालांकि भवन का तकनीकी मूल्यांकन अभी बाकी है और अंतिम लागत इससे कहीं अधिक भी हो सकती है।
सवाल यह भी है कि क्या एक उत्पाद निरीक्षक की वैध आय इतनी होती है कि वह इतनी बड़ी संपत्ति खड़ी कर सके?
तलाशी के दौरान जांच टीम को एलआईसी समेत अन्य बीमा कंपनियों की पांच पॉलिसियों के दस्तावेज मिले। इनमें हर साल करीब तीन लाख रुपये प्रीमियम जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा खुद और परिवार के नाम पर विभिन्न बैंकों में आठ खाते तथा पीपीएफ में करीब 54 लाख रुपये जमा पाए गए। इन खातों को फिलहाल फ्रीज करने की कार्रवाई की गई है। एक बैंक लॉकर भी मिला है, जिसकी तलाशी अभी बाकी है। यानी कहानी अभी पूरी नहीं हुई है, बल्कि असली राज शायद लॉकर खुलने के बाद सामने आए।

जांच में सामने आया कि अंकेश गोंड़ को महंगी गाड़ियों का भी खासा शौक था। दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने 25 लाख रुपये से अधिक कीमत की इनोवा क्रिस्टा, चार मोटरसाइकिल और एक टाटा अल्ट्रोज कार खरीदी। इतना ही नहीं, उनके ससुर के नाम पर खरीदी गई हुंडई आई-10 कार भी जांच के दायरे में आ गई है। ईओयू का दावा है कि उत्पाद विभाग की नीलामी में जब्त वाहन भी ससुर के नाम पर खरीदे गए। यहीं नहीं रुका मामला। जांच एजेंसी के अनुसार एक महिंद्रा स्कॉर्पियो रिश्तेदार के नाम पर खरीदी गई और उसे विभाग में अनुबंध पर लगाकर खुद उपयोग किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान यह वाहन मुंगेर स्थित आवास पर मिला। अब सवाल यह है कि क्या रिश्तेदारों और परिजनों के नाम पर संपत्ति खड़ी कर असली मालिकाना हक छिपाने की कोशिश की गई?
ईओयू की जांच में यह भी सामने आया कि इंस्पेक्टर के तीनों बच्चे पटना के प्रतिष्ठित डीपीएस स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि बच्चों की पढ़ाई कोई अपराध नहीं है, लेकिन जब आय और खर्च का हिसाब मेल नहीं खाता, तो हर बड़ा खर्च जांच का हिस्सा बन जाता है।

ईओयू की टीम ने पटना के दानापुर स्थित आवास, मुंगेर के पैतृक घर, मुंगेर के व्यावसायिक भवन, सीवान स्थित उत्पाद विभाग कार्यालय और सीवान के किराये के आवास समेत कुल पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। सभी जगहों पर डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में कार्रवाई की गई।
ईओयू ने अंकेश राज गोंड़ पर आय से 2.36 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह सिर्फ एक अधिकारी की कहानी है या फिर सरकारी तंत्र में ऐसी संपत्तियां बनाने का कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है?
फिलहाल जांच जारी है। बैंक लॉकर खुलना बाकी है, संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन होना बाकी है और कई दस्तावेजों की जांच भी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।