नई व्यवस्था के अनुसार आयकर गोलंबर, विकास भवन और पटना जू गेट नंबर-1 के सामने बनने वाले मेट्रो स्टेशनों के निर्माण के दौरान बेली रोड के केवल आधे हिस्से का उपयोग दोनों दिशाओं के वाहनों के आवागमन के लिए किया जाएगा। लगभग 30 मीटर चौड़ी इस सड़क को अस्थायी रूप से दो लेन में विभाजित किया जाएगा, जिससे एक ही फ्लैंक से दोनों तरफ का ट्रैफिक संचालित किया जा सके। प्रशासन का उद्देश्य है कि मेट्रो निर्माण और यातायात संचालन दोनों एक साथ बिना किसी बड़ी बाधा के चलते रहें।
इस योजना की सबसे खास विशेषता कृत्रिम (अस्थायी) मेडियन होगी। यह एक ऐसा मूवेबल डिवाइडर होगा, जिसे निर्माण कार्य की जरूरत के अनुसार सड़क के एक किनारे से दूसरे किनारे पर आसानी से स्थानांतरित किया जा सकेगा। यदि सड़क के उत्तरी हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा होगा, तो मेडियन को दक्षिण दिशा में स्थापित किया जाएगा और दक्षिणी हिस्से से दोनों ओर का ट्रैफिक गुजरेगा। इसी तरह जब दक्षिणी हिस्से में निर्माण शुरू होगा, तो डिवाइडर को उत्तर दिशा में शिफ्ट कर दिया जाएगा और ट्रैफिक उत्तर वाले हिस्से से संचालित किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस लचीली व्यवस्था से ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। चूंकि बेली रोड राजधानी की लाइफलाइन मानी जाती है और इस मार्ग से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, इसलिए निर्माण के दौरान यातायात को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं था। इसी वजह से इस फ्लेक्सिबल ट्रैफिक सिस्टम को अपनाने का निर्णय लिया गया है।
इस संबंध में गुरुवार को ट्रैफिक एसपी सागर कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पटना मेट्रो निर्माण कंपनी के अधिकारियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों और ट्रैफिक प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि निर्माण कार्य की वजह से आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।
बैठक में विकास भवन, नियोजन भवन, विश्वेश्वरैया भवन और लोक भवन के स्टाफ क्वार्टर की चहारदीवारी सहित कुछ अन्य संरचनाओं को सुरक्षित तरीके से हटाने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि किसी भी सरकारी भवन या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए बिना निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए। साथ ही सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान समय-समय पर ट्रैफिक व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्थान पर वाहनों का दबाव बढ़ता है, तो मौके की स्थिति के अनुसार ट्रैफिक डायवर्जन या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती भी की जाएगी, ताकि वाहन चालकों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पटना मेट्रो परियोजना को राजधानी के सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा हो और शहर की यातायात व्यवस्था भी सामान्य बनी रहे। फ्लेक्सिबल ट्रैफिक प्लान को इसी उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिससे विकास कार्य और आम लोगों की सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।