Bihar Dairy Industry : बिहार सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से सात निश्चय-3 के तीसरे निश्चय ‘कृषि में प्रगति-प्रदेश में समृद्धि’ के तहत राज्यभर में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने का बड़ा फैसला लिया है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन किया जा रहा है, ताकि पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल सके और दुग्ध उत्पादन को संगठित रूप से बढ़ाया जा सके।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार के कुल 39,073 गांवों में से अब तक 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन किया जा चुका है। शेष गांवों में भी अगले दो वर्षों के अंदर समितियों के गठन का निर्देश पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दिया गया है। इन समितियों के गठन से गांव स्तर पर दूध संग्रहण, गुणवत्ता जांच और उचित मूल्य सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। इससे पशुपालकों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
पंचायत स्तर पर खुलेंगे सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र
सरकार ने सात निश्चय-2 के तहत पहले ही राज्य के सभी प्रखंडों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र स्थापित कर दिए हैं। अब सात निश्चय-3 के अंतर्गत इस योजना का विस्तार करते हुए सभी पंचायतों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया है। राज्य की कुल 8,053 पंचायतों में से फिलहाल 100 पंचायतों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र शुरू हो चुके हैं। शेष 7,953 पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक नए बिक्री केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि पंचायतों में खुलने वाले नए सुधा दुग्ध बिक्री केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभान्वित जीविका दीदियों को आवंटित किया जाए। इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती
डेयरी व्यवसाय के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। गांवों में दुग्ध उत्पादन और विपणन की बेहतर व्यवस्था होने से स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। साथ ही राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे आम उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा।
सरकार का मानना है कि दुग्ध उत्पादन समितियों और सुधा बिक्री केंद्रों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पशुपालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। यह योजना न केवल किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





