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अब LPG की टेंशन भूल जाइए! बिहार के PDS दुकानों पर मिलेगा कोयला, सम्राट सरकार का बड़ा फैसला

Bihar News: ईरान-अमेरिका तनाव से एलपीजी संकट के बीच बिहार सरकार ने पीडीएस दुकानों पर कुकिंग कोयला उपलब्ध कराने का फैसला लिया है.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 22, 2026, 9:00:49 AM

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar News: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और दक्षिण-पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो गई है, जिससे बिहार में रसोई गैस (एलपीजी) की कमी उत्पन्न हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों के माध्यम से किरोसिन के साथ-साथ कुकिंग कोयला उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।


खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने बताया कि ऊर्जा सप्लाई चेन बाधित होने से आम लोगों को खाना बनाने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में एलपीजी की कमी को दूर करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराने के लिए कोयला आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है।


इस संबंध में विभाग ने खान एवं भूतत्व विभाग, परिवहन विभाग के सचिवों और सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़े लाभुकों को पीडीएस दुकानों के जरिए कुकिंग कोयला उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी निगरानी जिला और राज्य स्तर पर की जाएगी।


हालांकि, पीडीएस दुकानों में रियायती दर पर किरोसिन आपूर्ति की स्थिति अभी भी कमजोर है। पटना के डीलरों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। पटना के एडीएम (आपूर्ति) आरके दिवाकर के अनुसार, पिछली बार आया किरोसिन थोक विक्रेताओं को दिया गया था, लेकिन इस बार तेल कंपनियों से मिलने वाली आपूर्ति को सीधे पीडीएस दुकानों के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।


इधर, शादी-विवाह और बड़े आयोजनों में कमर्शियल एलपीजी की कमी के कारण कोयला और लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ी है। कोयला कारोबारी संजय कुमार के अनुसार, पहले 600-650 रुपये प्रति मन (40 किलोग्राम) मिलने वाला कोयला अब 800-900 रुपये तक पहुंच गया है। कीमतों में बढ़ोतरी का कारण मांग में वृद्धि और आपूर्ति की कमी है।


प्रशासन का मानना है कि कोयले की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और वहां खाना बनाने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में भी यह कदम सहायक साबित होगा।