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वैलेंटाइन डे पर गया पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत, माउंटेन मैन दशरथ मांझी के बेटे को झुककर किया प्रणाम

वैलेंटाइन डे के दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत गया के गेहलौर पहुंचे। उन्होंने दशरथ मांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी और उनके बेटे से आशीर्वाद लिया।

बिहार न्यूज
माउंटेन मैन को श्रद्धांजलि
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
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GAYAJEE:वैलेंटाइन डे के दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत गयाजी पहुंचे। जहां उन्होंने गेहलौर की उन पथरीली पहाड़ियों को देखा जिसे अपने हाथों से काटकर माउंटेन मैन दशरथ मांझी ने रास्ता बनाया था। बता दें कि 22 साल की कड़ी मेहनत से पहाड़ को काटकर बने इस रास्ते पर आज लोग आवागमन कर रहे हैं। निशांत ने माउंटेन मैन दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। 


इस दौरान निशांत ने दशरथ मांझी के बेटे को झुककर प्रणाम किया और आशीर्वाद लिया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत ने वहां लगी माउंटेन मैन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। निशांत ने दशरथ मांझी को इस मौके पर याद किया। मुख्यमंत्री के बेटे पहली बार दशरथ मांझी के द्वारा पहाड़ काटकर बनाए गए रास्ते को देखने पहुंचे थे। उन्होंने गेहलौर की पहाड़ियों को देखा और माउंटेन मैन की दृढ़ संकल्प की सराहना की। 


बता दें कि वैलेंटाइन डे प्यार के इजहार का दिन माना जाता है। दुनिया के कई प्रेम कहानियां मशहूर हैं। ऐसी ही एक लव स्टोरी बिहार के गयाजी जिले के गेहलौर पहाड़ की है। जो दुनिया के लिए मिसाल बन चुकी है। यह कहानी है माउंटेन मैन दशरथ मांझी की है। एक गरीब मजदूर दशरथ मांझी ने अपनी पत्नी के प्रेम में वह कर दिखाया, जो किसी बादशाह ने भी नहीं किया हो। दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया। ऐसा कहा जाता है कि एक दिन उनकी पत्नी खाना लेकर पहाड़ पार कर रही थीं, तभी रास्ते में फिसलकर गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने की वजह से पत्नी की मौत हो गई थी। 


इस दर्दनाक घटना ने दशरथ मांझी को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने ठान लिया कि अब गांव और शहर के बीच की दूरी को वो कम करके रहेंगे। जो पीड़ा उन्हें और उनकी पत्नी को झेलने पड़ी वह किसी और को ना झेलनी पड़े इसलिए उन्होंने हाथ में छेनी और हथौड़ी उठा लिया और अकेले पहाड़ को काटने की कसम खा लिया। उन्हें उस समय लोग पागल तक कहने लगे थे लेकिन लगातार 22 वर्षों की कठिन तपस्या और अथक मेहनत के बाद उन्होंने 360 फुट लंबी, 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊंची गेहलौर पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया। पहाड़ को काटकर बने रास्ते से 55 किलोमीटर की दूरी घटकर महज 15 किलोमीटर सिमत कर रह गई। जिससे लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिली। उनका जन्म 14 जनवरी 1934 को हुआ था। 17 अगस्त 2007 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। 



पटना से प्रेम की रिपोर्ट

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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