1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 13, 2026, 6:49:49 PM
प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर - फ़ोटो सोशल मीडिया
PATNA: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोलियम उत्पादों के उपयोग को कम करने की अपील का असर अब सरकारी और निजी संस्थानों तक दिखने लगा है। पटना के बिहटा स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (Netaji Subhas Medical College & Hospital) ने अपने डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर दिया है.
नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने कारपूलिंग और पूल्ड ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। अस्पताल की ओर से जारी एडवाइजरी नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा गया है: “खाड़ी युद्ध (Gulf War) की वर्तमान स्थिति और ईंधन के संरक्षण तथा पेट्रोलियम उत्पादों की खपत को कम करने की आवश्यकता को देखते हुए, सभी पोस्ट ग्रेजुएट्स, सीनियर रेजिडेंट्स, असिस्टेंट प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स तथा अन्य फैकल्टी सदस्यों से अनुरोध किया जाता है कि वे नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आने-जाने के दौरान पूल्ड/साझा परिवहन व्यवस्था का अधिकतम संभव उपयोग करें।इस मामले में आपका सहयोग बड़े जनहित में अत्यंत सराहनीय होगा।” यह नोटिस संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) रंजीत कुमार सिंह की ओर से जारी किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया (खाड़ी क्षेत्र) में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है। इस स्थिति में विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और अर्थव्यवस्था पर बोझ कम करने के लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सुझाव दिया था कि लोग सार्वजनिक परिवहन (बस, ट्रेन) का अधिक से अधिक उपयोग करें. सफर में मेट्रो और लोकल ट्रेनों को प्राथमिकता दें. इसके साथ ही कारपूलिंग (साझा वाहन) का इस्तेमाल किया जाये. देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दिया जाये औऱ लोग अनावश्यक यात्राओं से बचें।
NSMCH की सक्रियता
नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बिहटा बिहार का एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान है। यहां रोजाना सैकड़ों डॉक्टर्स, रेजिडेंट्स, फैकल्टी मेंबर्स और स्टाफ आते-जाते हैं। अस्पताल प्रशासन ने प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लेते हुए तुरंत अमल शुरू कर दिया है। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि संस्थान में कार्यरत सभी वरिष्ठ चिकित्सकों और फैकल्टी को व्यक्तिगत वाहनों के बजाय साझा वाहनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और यातायात दबाव में भी कमी आएगी।राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावप्रधानमंत्री की अपील के बाद कई राज्य सरकारें, सरकारी विभाग और निजी संगठन सक्रिय हो गए हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत कई शहरों में कारपूलिंग ऐप्स पर ट्रैफिक बढ़ा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी ईंधन बचत के लिए जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर देशव्यापी स्तर पर यह अभियान सफल रहा तो आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी।
नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज जैसी संस्थाओं द्वारा उठाया गया यह कदम प्रधानमंत्री मोदी की अपील को जमीन पर उतारने का एक सकारात्मक उदाहरण है। जब चिकित्सा क्षेत्र जैसे जरूरी सेवाओं वाले संस्थान भी ईंधन संरक्षण में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, तो यह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। आम नागरिकों, अन्य अस्पतालों और संगठनों से भी यही अपेक्षा की जा रही है कि वे इस राष्ट्रहित के अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।