1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 06, 2026, 1:41:03 PM
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IRCTC Scam : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार को बहुचर्चित IRCTC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई हुई। इस केस में पूर्व रेल मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि आज होने वाला बहुप्रतीक्षित फैसला कोर्ट ने फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 मई को होगी, जिसके बाद आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने इस केस में आरोप तय करने की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली थी। आज की सुनवाई में माना जा रहा था कि कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों और दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए निर्णय सुरक्षित रखने का आदेश दिया। इससे मामले की कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ गई है और पक्षकारों को अगली तारीख तक इंतजार करना होगा। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में काफी चर्चा है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ है और इसमें कई बड़े राजनीतिक नाम शामिल हैं।
ईडी की चार्जशीट और आरोप
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले ही चार्जशीट दाखिल की थी। ईडी का आरोप है कि IRCTC होटल लीज घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की गई और सरकारी प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार के जरिए संपत्ति अर्जित की गई और बाद में उसे वैध रूप देने की कोशिश की गई। चार्जशीट में लालू परिवार सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घोटाले में कई लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी गहन जांच की गई।
क्या है पूरा IRCTC मामला?
यह मामला वर्ष 2017 में उस समय सामने आया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लालू प्रसाद यादव और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। आरोप है कि जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब IRCTC के दो होटलों के रख-रखाव और संचालन का ठेका निजी कंपनियों को दिया गया था।
CBI का दावा है कि इस टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई और बदले में पटना में लगभग तीन एकड़ जमीन ली गई। आरोप है कि यह जमीन एक कंपनी के माध्यम से लेन-देन में शामिल हुई, और बाद में इसका मालिकाना हक बदलते हुए राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से जुड़ी कंपनी तक पहुंच गया। जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि इस जमीन पर आगे चलकर बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट, जैसे मॉल निर्माण, की योजना बनाई गई थी, जिससे आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
लालू पक्ष की दलील
इस पूरे मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की ओर से लगातार यह दलील दी जा रही है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि इस मामले में किसी प्रकार का प्रत्यक्ष सबूत नहीं है, जो यह साबित करे कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार किया है।
लालू पक्ष की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं और यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि उन्हें इस केस में बरी किया जाना चाहिए क्योंकि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
राजनीतिक असर और आगे की राह
IRCTC घोटाला मामला केवल एक कानूनी केस नहीं बल्कि बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में भी इसका बड़ा प्रभाव माना जा रहा है। लालू परिवार बिहार की राजनीति में एक बड़ा नाम रहा है और इस केस की हर सुनवाई पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहती है। अब 22 मई की अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन यह तय हो सकता है कि मामले में आगे मुकदमा चलेगा या आरोपियों को राहत मिलेगी।फिलहाल अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखकर सभी पक्षों को इंतजार में डाल दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला फिर से सुर्खियों में रहेगा और इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।