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BIHAR NEWS : बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा एक्शन! जानिए सबसे ज्यादा किस विभाग में? निगरानी ने कर दिया खुलासा, सिर्फ 4 महीनों में 51 कार्रवाई

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य निगरानी विभाग ने 2026 में अब तक का सबसे बड़ा और तेज अभियान चलाया है। महज चार महीनों में 51 बड़ी कार्रवाई और 46 ट्रैप केस दर्ज किए गए हैं। राजस्व, पुलिस और कई अन्य विभागों में लगातार हो रही कार्रवाई ने प्रशासनिक तंत

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 06, 2026, 2:01:58 PM

BIHAR NEWS : बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा एक्शन! जानिए सबसे ज्यादा किस विभाग में? निगरानी ने कर दिया खुलासा, सिर्फ 4 महीनों में 51 कार्रवाई

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BIHAR NEWS : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार और निगरानी विभाग ने इस वर्ष बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। महज चार महीनों के भीतर ही विभाग ने कुल 51 बड़ी कार्रवाईयां की हैं, जिनमें सबसे अधिक 46 मामले रंगेहाथ (ट्रैप केस) पकड़ने से जुड़े हैं। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे तेज और सख्त अभियान माना जा रहा है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।


निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार की कार्रवाई केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे मौके पर रिश्वत लेते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को पकड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। यही कारण है कि ट्रैप केस की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है।


चार महीनों में तेज रफ्तार कार्रवाई

राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान में कुल 51 मामलों में कार्रवाई की गई है। इनमें भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति, पद के दुरुपयोग और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। विभाग का कहना है कि यह अभियान पिछले 16 वर्षों में सबसे तेज और प्रभावी माना जा रहा है। निगरानी विभाग के अनुसार, इस बार रणनीति में बदलाव करते हुए सीधे ट्रैप केस पर फोकस किया गया है ताकि भ्रष्टाचार को जड़ से रोका जा सके और दोषियों को मौके पर ही पकड़ा जा सके।


विभागवार सामने आए सबसे ज्यादा मामले

आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य के कुछ विभागों में भ्रष्टाचार के मामले ज्यादा सामने आए हैं। इनमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और पुलिस विभाग सबसे ऊपर हैं।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: 8 मामले

पुलिस विभाग: 8 मामले

पंचायती राज विभाग: 4 मामले

स्वास्थ्य विभाग: 3 मामले

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग: 2 मामले

खनन विभाग: 2 मामले

शिक्षा विभाग: 2 मामले


इसके अलावा ग्रामीण विकास, कृषि विभाग, युवा रोजगार एवं कौशल विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, कलेक्ट्रेट, सहकारिता विभाग, आयुक्त कार्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर भी 1-1 मामला दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई प्रशासनिक स्तरों पर फैला हुआ है।


ट्रैप केस पर विशेष फोकस

इस वर्ष की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि निगरानी विभाग ने ट्रैप मामलों पर विशेष ध्यान दिया। 51 में से 46 मामले सीधे रंगेहाथ पकड़ने से जुड़े हैं। इसका अर्थ है कि रिश्वत लेते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया। इस तरह की कार्रवाई से न केवल भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी, बल्कि सरकारी दफ्तरों में कामकाज की पारदर्शिता भी बढ़ेगी।


सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति

राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इस अभियान के आंकड़े भी इसी दिशा में एक मजबूत संकेत माने जा रहे हैं। निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में ऐसे और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत किया जाए।


पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ी सख्ती

अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल की कार्रवाई कहीं अधिक आक्रामक दिखाई देती है—

2021: 18 मामले

2022: 21 मामले

2023: 19 मामले

2024: 3 मामले

2025: 21 मामले

2026 (अब तक): 51 मामले

इन आंकड़ों से साफ है कि 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में जबरदस्त तेजी आई है। सिर्फ चार महीनों में 51 मामले दर्ज होना इस बात का संकेत है कि निगरानी विभाग अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय हो गया है।


आगे और सख्त कार्रवाई के संकेत

निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का फोकस अब उन क्षेत्रों पर रहेगा जहां शिकायतें अधिक मिल रही हैं और जहां रिश्वतखोरी की संभावना ज्यादा है। सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने और जनता को बिना बाधा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इस तरह की कार्रवाई को अहम माना जा रहा है।


चार महीनों में 51 कार्रवाई और 46 ट्रैप केस यह दर्शाते हैं कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब पहले से कहीं अधिक सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। विभागवार आंकड़े बताते हैं कि कई विभागों में अभी भी सुधार की जरूरत है, लेकिन तेज कार्रवाई यह संकेत देती है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह अभियान केवल आंकड़ों तक सीमित रहता है या वास्तव में प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी सुधार ला पाता है।