1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 13, 2026, 10:26:56 AM
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Bihar News : बिहार के मुख्यमंत्री ने पद्मविभूषण डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी के निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि किसानों के उत्थान और कृषि विकास में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि डॉ. त्रिवेदी का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। इसी बीच मंगलवार को पटना के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कृषि जगत, वैज्ञानिक समुदाय और बिहार में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से कृषि अनुसंधान और किसानों के हित में कार्य कर रहे थे। विशेष रूप से लीची उत्पादन और बागवानी क्षेत्र में उनके योगदान को देशभर में सराहा जाता था।
डॉ. त्रिवेदी के पुत्र डॉ. रमन त्रिवेदी ने बताया कि रविवार को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद उन्हें पटना स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की लगातार निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन तीन दिनों तक चले उपचार के बाद मंगलवार को उनका निधन हो गया। परिवार के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर निवासी डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ा नाम थे। उन्होंने विशेष रूप से बिहार की पहचान मानी जाने वाली लीची की खेती को बचाने और उसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण शोध किए। उन्होंने “री-जुवेनेशन कैनोपी मैनेजमेंट तकनीक” पर काम कर पुराने और कमजोर हो चुके लीची बागानों को नया जीवन देने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी इस तकनीक से हजारों किसानों को लाभ मिला और लीची उत्पादन में नई संभावनाएं खुलीं।
कृषि विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था। उन्होंने अपने शोध और अनुभव के माध्यम से बिहार के किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक किया। उनके मार्गदर्शन में कई कृषि परियोजनाएं सफल हुईं और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली। वे हमेशा खेती को वैज्ञानिक तरीके से करने पर जोर देते थे।
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी के निधन पर कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और किसान संगठनों ने भी शोक जताया है। कई कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि उनका जाना कृषि क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में बागवानी और कृषि अनुसंधान को नई दिशा दी।
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उन्होंने यह साबित किया कि वैज्ञानिक शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।