1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 19, 2026, 8:24:51 AM
- फ़ोटो
Bihar News : बिहार स्वास्थ्य विभाग ने परिचारिका संवर्ग की स्टाफ नर्सों को बड़ी राहत देते हुए मातृत्व अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में अहम प्रशासनिक बदलाव किया है। विभाग की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार अब स्टाफ नर्सों के मातृत्व अवकाश को मंजूरी देने की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को सौंप दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पहले लागू की गई व्यवस्था में कई तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें सामने आ रही थीं, जिसके कारण यह संशोधन करना आवश्यक हो गया।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर 2025 में एक आदेश जारी कर मातृत्व अवकाश मंजूर करने का अधिकार जिलों में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दिया था। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में यह जिम्मेदारी अधीक्षक तथा अतिविशिष्ट अस्पतालों में निदेशक को सौंपी गई थी। सरकार का उद्देश्य उस समय अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया को केंद्रीकृत और व्यवस्थित बनाना था ताकि मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।
हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई स्तरों पर परेशानियां सामने आने लगीं। विभागीय सूत्रों के अनुसार फाइलों के लंबित रहने, तकनीकी आपत्तियों और प्रक्रिया में देरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। कई स्टाफ नर्सों को समय पर मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं हो पा रहा था, जिससे उन्हें प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पुराने आदेश की समीक्षा की और अब नई अधिसूचना जारी कर दी है।
निदेशक प्रमुख (नर्सिंग) Rekha Jha की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पूर्व में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। इसके साथ ही मातृत्व अवकाश स्वीकृति की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को प्रदान की जाती है। यानी अब स्टाफ नर्सों के अवकाश से जुड़े मामलों का निपटारा उसी स्तर पर होगा जहां उनकी नियुक्ति से संबंधित प्रशासनिक अधिकार मौजूद हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से मातृत्व अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी। पहले कई मामलों में फाइलें अलग-अलग स्तरों पर लंबित हो जाती थीं, जिसके कारण महिला कर्मियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। अब नियुक्ति प्राधिकार के पास सीधे अधिकार होने से प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम होने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यभर में कार्यरत स्टाफ नर्सों और महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मातृत्व अवकाश महिलाओं का महत्वपूर्ण अधिकार है और इसकी स्वीकृति में देरी होने से व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ता है। नई व्यवस्था से समय पर अवकाश मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे महिला कर्मियों को राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में महिला कर्मी कार्यरत हैं और मातृत्व अवकाश से जुड़े मामलों का समय पर समाधान बेहद जरूरी होता है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ महिला कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने वाला कदम माना जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में इस नई व्यवस्था के प्रभाव की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यदि कहीं कोई समस्या सामने आती है तो उसमें आवश्यक सुधार किया जा सके। फिलहाल सरकार के इस फैसले को महिला स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बड़ी राहत और सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।