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Bihar Ips Officer: जनहित में जबरिया रिटायर..! जब नीतीश सरकार ने एक ही दिन में 2 IPS अफसरों को 'नौकरी' से हटा दिया था, अजब-गजब हरकत से परेशान थी सरकार

जबरन रिटायर आईपीएस अमिताभ कुमार दास फिर सुर्खियों में हैं। 2018 में नीतीश कुमार सरकार ने जनहित में 1994 बैच के आईपीएस अमिताभ दास और 1985 बैच के अजय कुमार वर्मा को जबरन सेवानिवृत्त किया था। जानिए पूरा मामला और विवादों का इतिहास।

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Viveka Nand
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Bihar Ips Officer: बिहार में इन दिनों जबरिया रिटायर आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास की चर्चा हो रही है. नीट छात्रा मामले में अमिताभ दास के आरोपों के बाद सरकार सख्त हो गई है. इसके बाद पटना पुलिस ने केस दर्ज कर रिटायर आईपीएस अधिकारी के खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू कर दी है. यह वही अमिताभ दास हैं जिनकी हरकतों से सरकार परेशान हो गई थी. बात 2018 की है जब नीतीश सरकार ने जनहित में बड़ा फैसला लिया था. एक ही दिन में बिहार कैडर के दो आईपीएस अधिकारियों को जनहित में जबरन रिटाय़र घोषित कर दिया था. 

अमिताभ दास को जनहित में जबरन रिटायर किया गया था... 

नीतीश सरकार के गृह विभाग ने 13 अगस्त 2018 को अधिसूचना जारी किया था. जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार की सहमति से केंद्र सरकार ने 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास को जनहित में तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत करने का निर्णय लिया है. समय पूर्व सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक नोटिस के बदले में तीन माह के वेतन-भत्ता की राशि भुगतान का निर्णय लिया गया है. इस संबंध में गृह मंत्रालय ने 18 जुलाई 2018 को जानकारी दी है. इस आलोक में अमिताभ कुमार दास जो पुलिस अधीक्षक सह सहायक नागरिक सुरक्षा आयुक्त हैं,इन्हें तत्काल प्रभाव से भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत किया जाता है .

अजय वर्मा को भी जबरन रिटायर किया गया था....

वहीं, नीतीश सरकार ने 13 अगस्त 2018 को एक और आईपीएस अधिकारी को जबरन रिटायर करने का पत्र जारी किया. जिसमें कहा गया कि 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार वर्मा को राज्य सरकार की सहमति से केंद्र सरकार ने जनहित में तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत करने का निर्णय लिया है.  समय पूर्व सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक नोटिस के बदले में तीन माह के वेतन-भत्ता की राशि भुगतान का निर्णय लिया गया है. इस संबंध में गृह मंत्रालय ने 18 जुलाई 2018 को जानकारी दी है. इस आलोक में 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार वर्मा जो उप निदेशक नागरिक सुरक्षा बिहार के पद पर पदस्थापित हैं, उन्हें भारतीय पुलिस सेवा से समय पूर्व सेवानिवृत्ति किया जाता है.

आईपीएस अफसर अमिताभ दास के अजब-गजब हरकत से परेशान थी सरकार 

बता दें, अमिताभ कुमार दास की कार्यशैली से सरकार परेशान थी. अपने सेवा काल में दास अपनी टिप्पणी और फाइल पर आदेशों के कारण हमेशा विवादों में रहे. सेवा में रहते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ फाइल पर टिप्पणी की थी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में अधिकांश समय वो निलंबित रहे हैं. बाद में कोर्ट के आदेश से उनका निलंबन टूटा था. लेकिन, अमिताभ दास जिस तरह से विवादों में फंसे, उसके बाद सरकार ने जबरन रिटाय़र करने का निर्णय लिया. केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद नीतीश सरकार ने अमिताभ कुमार दास को जबरन रिटायर करने का आदेश जारी कर दिया है. 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी दास को जब अनिवार्य सेवानिवृति दी गई तब वे एसपी सह सहायक नागरिक सुरक्षा आयुक्त थे. बता दें, 1994 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी वर्तमान में डीजी रैंक में प्रोन्नत हो गए हैं.  जबकि अमिताभ दास अपनी कार्यशैली की वजह से 2018 तक एसपी रैंक में ही कार्यरत्त रहे.

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास को पटना पुलिस ने शुक्रवार (13 फरवरी, 2026) की शाम हिरासत में ले लिया था. पटना स्थित उनके घर पुलिस छापेमारी की गई. जनवरी 2026 में पटना में एक नीट छात्रा की मौत हुई थी. इस मामले में वे कई तरह की टिप्पणी कर रहे थे. इसके बाद पटना के चित्रगुप्त नगर थाने में पुलिस ने मामला दर्ज किया था. छापेमारी के लिए कई थानों की पुलिस पहुंची थी. 

पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद जबरिया रिटायर अधिकारी अमिताभ दास ने मीडिया के सामने जाते-जाते बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा था कि, निशांत कुमार को बचाने के लिए मुझे गिरफ्तार किया जा रहा है. मेरे पास सबूत है. सीबीआई को दूंगा. अभी मेरी हत्या की कोशिश की गई है. घर में मेरे कुछ सामान इन लोगों (पुलिस टीम) ने रख दिए हैं. लगातार इन्हें (हिरासत में लेने गई टीम को) फोन पर निर्देश आ रहा था कि निशांत कुमार को बचाना है. अमिताभ दास को गिरफ्तार करो." 



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रिपोर्टर / लेखक

Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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