1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 18, 2026, 11:00:22 AM
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Bihar News: बिहार में पंचायत चुनाव से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां एक अधिकारी को बचाने की कोशिश अब कई अफसरों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। मुजफ्फरपुर जिले के मुरौल प्रखंड में हुए चुनावी गड़बड़ी के मामले में अब कार्रवाई तेज हो गई है और देरी करने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
दरअसल, यह पूरा मामला वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव से जुड़ा है। उस दौरान मुरौल प्रखंड में मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। जांच के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को सही पाया और तत्कालीन बीडीओ चंद्रकांता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने न सिर्फ उन्हें नोटिस जारी किया, बल्कि उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने का स्पष्ट आदेश भी दिया था।
हालांकि, यहीं से पूरे मामले ने एक अलग मोड़ ले लिया। फरवरी 2022 में बीडीओ ने अपना स्पष्टीकरण दिया, जिसे आयोग ने असंतोषजनक माना और आगे कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने इस मामले को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। आरोप है कि बीडीओ को बचाने के लिए जानबूझकर फाइल को दबाकर रखा गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह आरोप पत्र करीब साढ़े तीन साल तक लंबित रखा गया और अंततः तब दाखिल किया गया, जब संबंधित बीडीओ की सेवानिवृत्ति में सिर्फ दो दिन बाकी थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि पूरे मामले में जानबूझकर देरी की गई, ताकि आरोपी अधिकारी को सख्त कार्रवाई से बचाया जा सके।
अब इस लापरवाही और कथित मिलीभगत पर ग्रामीण विकास विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की अपर सचिव मंजु प्रसाद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जिलाधिकारी को दिया है। जानकारी के मुताबिक, इस फाइल ने करीब आधा दर्जन यानी छह अधिकारियों के हाथों से गुजरते हुए भी आगे बढ़ने के बजाय रुककर रह गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह भी सामने आया है कि जिन अधिकारियों के पास फाइल रही, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय उसे टालने का काम किया। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस मामले की जड़ में एक और गंभीर गड़बड़ी भी सामने आई थी। मुरौल प्रखंड की ईटहा रसुलनगर पंचायत में मुखिया पद के एक उम्मीदवार का चुनाव चिह्न बदल दिया गया था। यह बेहद गंभीर मामला था, क्योंकि चुनाव चिह्न किसी भी उम्मीदवार की पहचान का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। उम्मीदवार ने पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन जब वहां सुनवाई नहीं हुई, तो मामला राज्य निर्वाचन आयोग और फिर हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
जांच में जब यह साबित हो गया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तब आयोग ने बीडीओ को दोषी मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन, जिस तरह से आरोप पत्र दाखिल करने में देरी की गई, उसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।
अब जब मामला फिर से खुला है, तो उन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, जिन्होंने इस फाइल को दबाकर रखा। विभाग ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजी जाएगी।