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बिहार के इस 'नगर परिषद' में करोड़ों का खेल...DM की जांच में EO की पकड़ी गई चाल, कार्रवाई वाली फाइल 'सरकार' के पास....

दाउदनगर नगर परिषद में करोड़ों रुपये की योजनाओं में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। डीएम की जांच में बिना टेंडर भुगतान, नियम विरुद्ध खरीद और नियुक्तियों का खुलासा हुआ। एक साल बाद भी कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Jul 14, 2026, 1:14:23 PM

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AI से सांकेतिक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar News: बिहार के नगर निकायों में बड़े पैमाने पर घोटाले की खबर निकल कर सामने आ रही है. हाल ही में फारबिसगंज नप के कार्यपालक पदाधिकारी, जिन पर करोड़ों रू के गबन के आरोप में केस दर्ज किया गया है, गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने दफ्तर में छापेमारी की थी.तब आरोपी ईओ फरार हो गए थे. साहेबगंज नगर परिषद में ईओ रहते रणधीर लाल पर 2 करोड़ 75 लाख 68 हजार के गबन मामले में केस दर्ज हुआ था. ऐसा ही मामला औरंगाबाद के दाऊदनगर नगर परिषद में सामने आया है. जिलाधिकारी ने करप्शन की जांच कराई. इसके बाद पूरी जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दिया. हालांकि अभी तक आरोपी कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. 

ईओ ऋषिकेश अवस्थी के खिलाफ जांच....

औरंगाबाद के दाउदनगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी के खिलाफ औरंगाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने जांच कराई थी. इसके बाद कार्रवाई को लेकर 18 जून 2025 को पूरी जांच रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को भेज दिया. जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी दाउदनगर की अध्यक्षता में जांच टीम बनाया था. जिसमें कहा गया कि 13 योजनाओं का स्थलीय जांच कराया गया, जिसमें मात्र चार योजनाएं ही पूर्ण थी. एक योजना की मापी पुस्तिका प्रस्तुत की गई, शेष योजनाओं का कार्य भी प्रारंभ नहीं किया गया था. जांच पदाधिकारी ने यह मंतव्य दिया की पूर्ण योजना की मापी पुस्तिका ससमय प्रस्तुत नहीं करना, योजना की गुणवत्ता को संदेह के घेरे में लाता है. 

एसडीओ ने मई 2025 में ही डीएम को भेजी थी जांच रिपोर्ट

अनुमंडल पदाधिकारी दाउदनगर ने मई 2025 में जिलाधिकारी को रिपोर्ट दिया था. जिसमें कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी और नप अध्यक्ष के खिलाफ योजनाओं में मनमानी, अनियमितता से संबंधित पूरी रिपोर्ट थी. नगर परिषद के अध्यक्ष और कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ 25 तरह के आरोप लगाए गए थे .

रिपोर्ट में ईओ और मुख्य पार्षद के गठजोड़ की खुली थी पोल

एसडीओ की जांच में सफाई एजेंसी तथा वर्तमान एजेंसी का एकरारनामा उपलब्ध नहीं कराया गया. वेपर लाइट अधिष्ठापन में कार्यपालक पदाधिकारी एवं अध्यक्ष द्वारा मनमानी ढंग से बिना टेंडर के भुगतान किया गया . तिरंगा लाइट क्रय में सशक्त स्थाई समिति का बिल पर अनुमोदन प्राप्त नहीं किया गया. स्थाई समिति से अनुमोदन के बिना ही लगभग 8:30 लाख रुपए का कंबल वितरण किया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया. विभिन्न वार्डों में रोड़ा-छाई भराई बिना प्राक्कलन एवं प्रशासनिक स्वीकृति के की गई. नाला निर्माण के क्रम में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे जलापूर्ति बाधित हो गई. जेसीबी का क्रय बिना क्रय समिति के गठन के ही किया गया. सशक्त स्थाई समिति का भी अनुमोदन नहीं लिया गया. क्रय के लिए जेम पोर्टल एवं अन्य स्रोत से निकाली गई निविदा की संचिका की मांग की गई, जो नहीं दी गई. खरीद किए गए सामानों की गुणवत्ता जांच के आधार पर भुगतान के लिए क्रय समिति एवं तकनीकी समिति के गठन की जानकारी मांगी गई जो नहीं दी गई .

कमर्शियल वाहन की जगह पर प्राइवेट वाहन जो अध्यक्ष के परिवार से जुड़े शख्स के नाम पर है,जिसका लॉग बुक भी संधारित नहीं की गई थी. गाड़ी एवं उपकरण से संबंधित संचिका की मांग की गई जो उपलब्ध नहीं कराया गया. ट्रांसफार्मर खरीद की संचिका की मांग की गई, जिससे उपलब्ध नहीं कराया गया. ट्रांसफार्मर खरीद पर अधिक राशि का व्यय किया गया. साथ ही अस्थाई संविदा पर नियुक्ति किस आधार पर की गई, इस बारे में भी जानकारी नहीं दी गई. कर्मियों की नियुक्ति नियमानुसार नहीं की गई, हाई मास्क लाइट की खरीद अधिक मूल्य पर किया गया .जबकि नगर विकास विभाग से क्रय प्रतिबंधित है, यह नगर विकास नियमावली का उल्लंघन है.

नगर परिषद दाउदनगर के कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी ने अपने जवाब में बताया कि कार्य की आवश्यकता के आलोक में अस्थाई कर्मियों की नियुक्ति की गई. इस संबंध में उन्होंने कोई विभागीय पत्र प्रस्तुत नहीं किया, न ही अस्थाई संविदा पर नियुक्ति कोे लेकर कोई नियम प्रस्तुत किया. हाई मास्क लाइट खरीद, अधिक मूल्य पर क्रय किए जाने के संबंध में कार्यपालक अधिकारी द्वारा बताया गया कि निविदा के माध्यम से जेम पोर्टल द्वारा खरीदारी की गई ,लेकिन यह वर्णित नहीं किया गया कि हाई मास्क लाइट खरीदना विभाग से प्रतिबंधित है या नहीं. जांच टीम ने पाया कि स्पष्टीकरण नहीं देना संदेह उत्पन्न करता है.

अब यह मामला नगर विकास विभाग के पास है. विभाग पूरे मामले को सुनकर और जांच रिपोर्ट के आधार पर अपना आदेश जारी करेगा. इस संबंध में शिकायतकर्ता संजय प्रसाद को जानकारी भेजी गई है.