Bihar News: बिहार के औरंगाबाद में अदालत के एक सख्त फैसले से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में लगातार देरी और न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद के सिविल जज (सीनियर डिवीजन प्रथम) डॉ. दीवान फहद ने कलेक्ट्रेट की कुर्की–जब्ती का आदेश जारी किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि पूर्व में पारित डिक्री (न्यायिक आदेश) का अनुपालन नहीं किया गया। संबंधित विभाग को पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद डिक्रीधारी हरे कृष्ण प्रसाद को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं दिया गया। मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने नाजिर को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर कुर्की की कार्रवाई कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें।
बताया जाता है कि जिला प्रशासन द्वारा मुआवजा भुगतान की स्पष्ट तिथि नहीं बताने पर अदालत ने यह कड़ा कदम उठाया। इस संबंध में जिला विधि शाखा को कई बार समय भी दिया गया था, लेकिन भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया।
अदालती आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। औरंगाबाद की डीएम अभिलाषा शर्मा ने बताया कि कोर्ट के आदेश की प्रति मंगाई जा रही है। विधि शाखा से राय लेने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मामले को आगे बढ़ाएगा।
सरकारी अधिवक्ता बृज प्रसाद सिंह ने बताया कि शो-कॉज नोटिस के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मुआवजा भुगतान कब तक किया जाएगा। इसी वजह से अदालत ने कुर्की का आदेश पारित किया है। मामले की अगली सुनवाई 09 मार्च को निर्धारित की गई है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन समय रहते कोर्ट के आदेश का पालन करता है या मामला और गंभीर रूप लेता है।




