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प्रशांत किशोर को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत, HC ने रद्द की PK के खिलाफ दर्ज FIR, क्या हैं मामला?

Prashant Kishor: ‘बात बिहार की’ अभियान से जुड़े मामले में प्रशांत किशोर को पटना हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा कि धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध नहीं होते।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated May 19, 2026, 6:07:01 PM

Prashant Kishor

पीके को हाई कोर्ट से राहत - फ़ोटो Google

Prashant Kishor: बिहार की राजनीति में चर्चित रहे ‘बात बिहार की’ अभियान से जुड़े आपराधिक मामले में प्रशांत किशोर को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया है।


न्यायाधीश संदीप कुमार ने अपने 51 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया कि मामले में जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं प्रथम दृष्टया सिद्ध नहीं होतीं। अदालत ने कहा कि प्रशांत किशोर के खिलाफ आपराधिक अभियोजन जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।


यह विवाद 2020 विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुए ‘बात बिहार की’ अभियान से जुड़ा है, जिसने उस समय राज्य की राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी। आरोप लगाया गया था कि एक अन्य अभियान ‘बिहार की बात’ के डेटा, डिजाइन और कॉन्सेप्ट की चोरी कर उनका इस्तेमाल किया गया।


शिकायतकर्ता का दावा था कि उनके सहयोगी ओसामा खुर्शीद लैपटॉप लेकर चले गए थे और उसी सामग्री का उपयोग बाद में प्रशांत किशोर के अभियान में किया गया। हालांकि हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एफआईआर में कहीं भी यह आरोप नहीं है कि किसी फर्जी दस्तावेज का निर्माण किया गया या किसी को धोखे से संपत्ति हस्तांतरण के लिए प्रेरित किया गया।


अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि किसी “आइडिया” या “थीम” पर कॉपीराइट लागू नहीं होता, बल्कि केवल उसकी प्रस्तुति और अभिव्यक्ति संरक्षित होती है। चूंकि मूल आपराधिक धाराएं ही स्थापित नहीं होतीं, इसलिए 120-बी (आपराधिक साजिश) की धारा भी टिक नहीं सकती। इसी आधार पर अदालत ने पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।