1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Apr 13, 2026, 11:15:18 AM
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Bihar News: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले हैं. कल 14 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक करेंगे, इसके बाद CM पद से इस्तीफा दे देंगे. दो दशक तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में अनगिनत बड़े फैसले लिए. इनकी खासियत रही है कि इन्होंने जितनी भी घोषणाएं की, उसे अधूरा नहीं छोड़ा. नवंबर 2025 में नई सरकार बनने के बाद भी मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाओं को लागू किया है. हाल के दिनों में नीतीश कुमार एक घोषणा बार-बार कर रहे थे, हर जिला मुख्यालय में जाकर ऐलान कर रहे थे, लेकिन लागू नहीं हो पाया था. अंतिम समय में बिना कैबिनेट की स्वीकृति के ही, आनन-फानन में उक्त घोषणा को लागू करने का संकल्प जारी किया गया. आखिर इसके पीछे का रहस्य क्या है ?
नीतीश कुमार की कोई घोषणा बचे नहीं, इस पर फोकस...
बिहार की सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक का संकल्प जारी किया है. स्वास्थ्य विभाग ने 11 अप्रैल को रोक संबंधी संकल्प जारी किया है. इतना बड़ा फैसला कैबिनेट की स्वीकृति के बिना ही लागू करने का संकल्प लिया गया. हालांकि सरकार ने कहा है कि इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश बाद में जारी किए जाएँगे. इस तरह के फैसले लिए जाने के पीछे बड़ी वजह सामने आई है. दरअसल, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को पद से इस्तीफा दे देंगे.इसके पहले वे कैबिनेट की बैठक करेंगे, इसके बाद पद छोड़ेंगे. पद छोड़ने से पहले इनकी कोई भी घोषणा अधूरी न रह जाए, इसकी समीक्षा की गई.
समृद्धि यात्रा में बार-बार कर रहे थे ऐलान
हाईलेवल की समीक्षा में एक बात निकलकर सामने आई. दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के क्रम में सभी जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में एक बड़ी घोषणा की थी. वो घोषणा थी ''सरकारी डॉक्टरों के प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक की.'' लेकिन वे इसे लागू नहीं कर पाए. चूंकि, चिकित्सकों के प्राईवेट प्रैेक्टिस पर रोक से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन तैयार नहीं हो सका था, लिहाजा प्रस्ताव को कैबिनेट में नहीं ले जाया गया. जब यह बात सामने आई तब रास्ता निकाला गया. यह तय हुआ कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते भर में ही, यह फैसला लागू किया जाना चाहिए. यह प्रस्ताव आगे चलकर कैबिनेट से स्वीकृत होगा. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक का संकल्प जारी किया.
नीतीश के गले में एक और विवादास्पद फैसला
सरकारी चिकित्सकों के प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक का संकल्प जारी हो गया. अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट से एप्रुवल मिलेगा. इसके बाद पूर्ण रूपेण इसे बिहार में लागू किया जायेगा. जैसे ही सरकार ने सरकारी चिकित्सकों के प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक का संकल्प जारी किया, विरोध शुरू हो गया है. सरकारी चिकित्सकों का संघ विरोध में उतर गया है. जानकार बताते हैं कि, आनन-फानन में बिना कैबिनेट स्वीकृति के ही प्रस्ताव का संकल्प जारी करने की पीछे बड़ा रहस्य है. पहला रहस्य तो यह कि भाजपा ने इस विवादास्पद प्रस्ताव को नीतीश कुमार के गले में डाल दिया है. सरकारी चिकित्सकों के प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाना इतना आसान काम नहीं है. नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू किया. 10 सालों बाद भी शराबबंदी कानून लागू करने की बात बेमानी साबित हो रही है, उसी तरह से प्राइवेट प्रैक्टिस रोक का प्रस्ताव मुमकिन नहीं दिखता. शराबबंदी की तरह अगर सरकारी चिकित्सकों के प्राईवेट प्रैक्टिस पर बैन नहीं किया जा सका, तो इसका ठीकरा नीतीश सरकार पर फूटेगा, और भाजपा अपने आप को बेदाग साबित करने में जुटी रहेगी. यानि बैन सफळ हुआ तो भाजपा नेतृत्व वाली सरकार और विफल हुआ तो नीतीश सरकार पर ठीकरा फूटना तय है.
चिकित्सकों का संघ विरोध में उतरा....
सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के प्रस्ताव को लेकर बिहार में विरोध तेज हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ और विश्व आयुर्वेद परिषद ने इसे एकतरफा निर्णय बताया है. तीनों संगठनों ने अलग-अलग बैठकों और बयानों के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां और सुझाव रखा है। आइएमए बिहार शाखा एवं बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की पटना में आयोजित बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में चिकित्सकों ने कहा कि निजी प्रैक्टिस को अनिवार्य रूप से बंद करने के बजाय वैकल्पिक (ऑप्शनल) रखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि सरकारी सेवा में आने वाले डॉक्टरों और चिकित्सा शिक्षकों पर प्रैक्टिस नहीं करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें विकल्प दिया जाना चाहिए।
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की कोर कमिटी और आइएमए सदस्यों की बैठक में सरकार के इस निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए स्वास्थ्यकर्मियों के रोजगार पर चिंता जताई गई। भासा ने अपनी 5 प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि इस फैसले पर सभी हितधारकों के साथ व्यापक विमर्श हो।
यदि नीति लागू करनी ही हो तो इसे वैकल्पिक रखा जाए और वर्तमान चिकित्सकों पर बाध्यकारी न बनाया जाए। साथ ही वेतन, भत्तों और कार्य-परिस्थितियों में सुधार तथा स्वास्थ्य संस्थानों की आधारभूत संरचना मजबूत करने की मांग की गई। संघ ने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करते हुए सभी हितधारकों, विशेषकर भासा के साथ विस्तृत विमर्श किया जाए। यदि नीति लागू करनी ही हो तो इसे अनिवार्य न रखते हुए वैकल्पिक बनाया जाए। वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों पर इसे बाध्यकारी न बनाते हुए केवल नई नियुक्तियों पर लागू किया जाए। डॉक्टरों के वेतन, भत्तों एवं कार्य-परिस्थितियों में सुधार किया जाए।