Bihar politics :कांग्रेस का कन्हैया कुमार को लेकर रुख अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कभी उन्हें दिल्ली की राजनीति में सक्रिय किया जाता है तो कभी बिहार में ,हालाँकि वो अभी तक इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में सफल नही हो पाए.अब बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर "नौकरी यात्रा" करने की दारोमदार उनके कंधे पर है.आपको बता दें की बिहार में युवाओं को साधने के लिए कांग्रेस ने कन्हैया कुमार को ये जिम्मेदारी दी है ,उनकी सक्रियता बढ़ाये जाने के बाद बिहार कांग्रेस में चर्चा तेज हो गयी है |
इस यात्रा में कन्हैया कुमार की अहम् भूमिका होने के कारण इसे उनकी बिहार की राजनीति में वापसी के तौर पर भी देखा जाने लगा है। पहले यह माना जा रहा था कि कन्हैया कुमार दिल्ली की राजनीति में ही सक्रिय रहेंगे, लेकिन अब वे बिहार में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं।हालाँकि उनको न तो बिहार में सफलता मिली और न ही दिल्ली में ,अब देखना ये होगा कि वो राजनितिक करिश्मा दिखा पातें है या नही ?
यह असमंजस दिखाता है कि कांग्रेस खुद तय नहीं कर पा रही कि कन्हैया कुमार को किस भूमिका में आगे बढ़ाना है। क्या वे बिहार में युवाओं को लुभाने का चेहरा होंगे या दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस का नया चेहरा बनेंगे? ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर खुद भ्रम में है या फिर सिर्फ उन्हें 'पोस्टर ब्वॉय' बनाकर इधर-उधर दौड़ा रही है।
सूत्रों के अनुसार ,इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस कन्हैया कुमार को कांग्रेस आलाकमान बिहार में बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। कन्हैया कुमार सोमवार को पटना पहुंच रहे हैं। इसे लेकर एक पोस्टर भी जारी किया गया है, जिसमें गया है, "बिहार की उम्मीद, कन्हैया कुमार का हार्दिक स्वागत"।
युवाओं के बीच अपने भाषण कला से प्रभावित करने वाले कन्हैया कुमार को कांग्रेस का इस तरह असमंजस में रखना कहीं न कहीं उसकी दिशाहीन राजनीति का संकेत है। अब देखने वाली बात होगी कि कन्हैया कुमार इस राजनीति को समझते हुए अपनी राह खुद तय कर पाएंगे या कांग्रेस की रणनीति में उलझकर सिमट जाएंगे।


