Bihar Election 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीति गर्मा गई है। पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस अभियान का पूर्ण बहिष्कार करने का एलान किया है।
पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बीएलओ या चुनाव कर्मी को अपने गांवों में प्रवेश की अनुमति न दें, और अगर कोई आ जाए तो चाय-पानी कराकर विदा कर दें, लेकिन कोई दस्तावेज या जानकारी न दें। पप्पू यादव ने मतदाता पुनरीक्षण कार्य को नौटंकी बताया है।
पप्पू यादव ने कहा कि यह अभियान गरीबों, युवाओं और पिछड़े वर्गों को मतदान से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि जनता सर्वोपरि है, चुनाव आयोग लोकतंत्र की सेवा के लिए है लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता को महायुद्ध छेड़ना होगा।
पप्पू यादव का आरोप है कि गरीबों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं होते हैं। पिछड़े, दलित, और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना दस्तावेजों के लाखों लोग वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना, तो उनके माता-पिता के कागजात कहां से आएंगे?
बता दें कि चुनाव आयोग 22 साल बाद बिहार में घर-घर जाकर वोटर सत्यापन करवा रहा है। जिन लोगों के नाम 2003 के बाद वोटर लिस्ट में जुड़े हैं, उन्हें पहचान प्रमाण देना होगा। यह प्रक्रिया आगामी अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि गरीबों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश हो रही है। RJD, कांग्रेस और वाम दलों ने भी मतदाता पुनरीक्षण की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं।


