1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 25, 2026, 10:23:39 AM
- फ़ोटो
Bihar School News : बिहार में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। अब राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों की दीवारों पर शिक्षा विभाग के केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जारी आदेश के मुताबिक राज्य के सभी प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 31 मई 2026 तक यह कार्य हर हाल में पूरा करना होगा। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के बाद निरीक्षण के दौरान जिन विद्यालयों में हेल्पलाइन नंबर अंकित नहीं पाया जाएगा, वहां के प्रधानाध्यापक और संबंधित जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि टोल-फ्री नंबर 14417 और 18003454417 को स्कूल के मुख्य द्वार, प्रवेश दीवार या किसी प्रमुख स्थान पर बड़े अक्षरों में लिखा जाए ताकि दूर से भी आसानी से पढ़ा जा सके। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से छात्र, अभिभावक और स्थानीय लोग बिना किसी डर या दबाव के सीधे अपनी शिकायत राज्य मुख्यालय तक पहुंचा सकेंगे।
दरअसल लंबे समय से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति, पढ़ाई में लापरवाही, मिड-डे मील की खराब गुणवत्ता और छात्र हित से जुड़ी योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में शिकायतें स्थानीय स्तर पर दबा दी जाती थीं, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पाती थी। अब हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक होने से लोग सीधे विभाग से संपर्क कर सकेंगे।
शिक्षा विभाग के अनुसार इस हेल्पलाइन पर कई तरह की शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी। इनमें शिक्षकों का समय पर स्कूल नहीं पहुंचना, कक्षाओं में पढ़ाई नहीं होना, मिड-डे मील में गड़बड़ी, स्कूलों में शौचालय, पेयजल और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, छात्रवृत्ति, पोशाक, साइकिल और किताब वितरण में अनियमितता जैसे मामले शामिल हैं।
विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी विद्यालयों में निर्धारित समय सीमा के भीतर हेल्पलाइन नंबर लिख दिए गए हों। निरीक्षण रिपोर्ट सीधे विभाग को भेजी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में शिकायतों को दबाने और बिचौलियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने में यह पहल काफी प्रभावी साबित हो सकती है। विभाग का मानना है कि जब शिकायतें सीधे राज्य मुख्यालय तक पहुंचेंगी तो जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज होगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह कदम सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और स्कूल प्रशासन पर जिम्मेदारी के साथ काम करने का दबाव बनेगा। आने वाले दिनों में इसका असर सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और व्यवस्थाओं पर देखने को मिल सकता है।