Bihar Politics: बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए सरकार सभी वर्गों और समुदाय के लोगों को खुश करने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री एक के बाद एक बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। इस बीच अल्पसंख्यक समुदाय को भी साधने की कोशिश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से की गई है। चुनाव से पहले पटना में गुरुवार को मदरसा शिक्षा बोर्ड का शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है। चुनाव से पहले इस शताब्दी समारोह के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
दरअसल, बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राजधानी पटना में शताब्दी समारोह का आयोजन भव्य रूप से किया गया। समारोह बापू सभागार और श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्यमंत्री ने मंच से समारोह का उद्घाटन किया और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि बिहार मदरसा बोर्ड ने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद ही राज्य में मुस्लिम समाज के लिए ठोस काम शुरू हुए। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय मुस्लिम समुदाय की उपेक्षा होती थी। नीतीश ने दावा किया कि 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद से ही कार्बिस्तान की घेराबंदी, अंतिम संस्कार की सुविधा, और महिलाओं को आर्थिक सहायता जैसे कार्य शुरू किए गए।
उन्होंने कहा कि वैसी मुस्लिम महिलाएं, जिन्हें उनके पति ने छोड़ दिया, उन्हें हमने 24 हजार रुपये की सहायता देना शुरू किया। अब किसी को मत छोड़िएगा। खासकर लड़कियों के साथ ऐसा मत करिए, उन्हें बहुत दिक्कत होती है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान अपनी सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वृद्धा पेंशन की राशि 400 से बढ़ाकर 1100 की गई है। इसके अलावा 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने की योजना और 430 नई योजनाओं की मंजूरी का भी जिक्र किया। सीएम ने बताया कि उन्होंने प्रगति यात्रा के दौरान जो कमियां देखीं, उन्हें दूर कराने का निर्देश दिया है। समारोह के दौरान नीतीश कुमार ने खुद लोगों से ज्ञापन भी प्राप्त किया और उन्हें जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
सियासी जानकारों की मानें तो यह शताब्दी समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है। मुस्लिम समाज की बड़ी भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


