1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 10, 2026, 6:14:47 PM
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Bankipur Assembly By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब बीजेपी प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी ने अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान करते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया. हालांकि, अभिषेक बंटी ने सार्वजनिक रूप से इसके पीछे "पारिवारिक कारणों" का हवाला दिया हैा, लेकिन अब इसके पीछे की असली वजह सामने आ गई है.
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बंटी को किसी पारिवारिक संकट की वजह से नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के चारा घोटाले (Fodder Scam) में शामिल होने और सजायाफ्ता होने के कारण पार्टी के दबाव में कदम पीछे खींचने पड़े हैं. बीजेपी ने अंदरूनी जांच-पड़ताल के बाद छवि खराब होने के डर से उनका नामांकन रद्द कराया है.
क्या है पूरा मामला और बंटी का पारिवारिक 'दागी' इतिहास?
बीजेपी ने जब अभिषेक बंटी को बांकीपुर से उम्मीदवार बनाया, तब उनके पारिवारिक बैकग्राउंड को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे. इसके बाद जब पार्टी स्तर पर गंभीर समीक्षा और मंथन हुआ, तो उनके माता-पिता से जुड़े गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार और सीबीआई (CBI) मामलों का खुलासा हुआ:
पिता रवींद्र प्रसाद का आपराधिक रिकॉर्ड:
अभिषेक बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद, मैसर्स मगध केमिकल्स कॉर्पोरेशन (M/s Magadh Chemicals Corporation, Patna) के मैनेजर के रूप में कार्यरत थे. सीबीआई ने जांच में पाया कि वह सरकारी खजाने (Local Government Treasuries) से फर्जी तरीके से पैसे निकालने और वित्तीय अनियमितताओं के मुख्य आरोपियों में से एक थे.
माता चंचला सिन्हा भी थीं शामिल:
इस फर्म की प्रोपराइटर और अभिषेक बंटी की मां, श्रीमती चंचला सिन्हा भी इस पूरे फर्जीवाड़े और चारा घोटाले की साजिश में बराबर की भागीदार थीं.
CBI कोर्ट से मिली सजा:
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बाद, सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (Special Judge for CBI cases) ने बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद और मां चंचला सिन्हा को दोषी करार देते हुए दो साल के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) और कुल ₹25,000 के जुर्माने की सजा सुनाई थी.
भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' के कारण बीजेपी ने लिया यू-टर्न
अभिषेक बंटी करीब दो दशक से बीजेपी से जुड़े रहे हैं, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे हैं और उन्हें पूर्व विधायक नितिन नवीन का बेहद करीबी माना जाता है. लेकिन जैसे ही उनके माता-पिता के चारा घोटाले में शामिल होने और जेल की सजा काटने के दस्तावेजी सबूत सामने आए, बीजेपी नेतृत्व के होश उड़ गए.
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर बीजेपी की 'भ्रष्टाचार विरोधी' छवि पर बड़ा हमला करने की तैयारी में था. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लिया और जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद अभिषेक बंटी को नामांकन वापस लेने का सख्त निर्देश दिया. यही कारण है कि बंटी ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र भेजकर अपना नाम वापस ले लिया.