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Life Style: युवाओं में बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर का खतरा, जानिए इसके पीछे की असली वजह

Life Style: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य उपकरणों का अत्यधिक उपयोग आम हो गया है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक गर्दन झुकाकर इन उपकरणों का उपयोग करने से शरीर के नाजुक हिस्सों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

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Life Style: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य उपकरणों का अत्यधिक उपयोग आम हो गया है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक गर्दन झुकाकर इन उपकरणों का उपयोग करने से शरीर के नाजुक हिस्सों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। ऐसे में जब गर्दन झुकी रहती है, तो उस पर लगभग 27 किलोग्राम के बराबर वजन का भार पड़ता है। इससे धीरे-धीरे सर्वाइकल (गर्दन की नसों और हड्डियों) की बीमारी शुरू हो सकती है, जो आगे चलकर कमर तक प्रभावित कर सकती है।


जानकारी के मुताबिक, पहले यह बीमारी सामान्यत: 50-60 वर्ष की उम्र में होती थी, लेकिन अब यह 15-20 वर्ष के युवाओं में भी देखी जा रही है। इसके कारण अक्सर सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, हाथ-पैर में कमजोरी और संतुलन में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आती हैं।


वहीं, सर्दियों के मौसम में लकवे के केसों में वृद्धि देखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि ब्लड प्रेशर के मरीज विशेष सावधानी रखें। दवाइयों का नियमित सेवन जरूरी है। नहाने के समय पानी का तापमान सामान्य रखें, सिर पर सीधे पानी डालने से बचें।


लकवे के संभावित संकेत-

चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी

हाथ या पैर में असामान्य कमजोरी

बोली अस्पष्ट या विचलित हो जाना

अचानक संतुलन बिगड़ना या चक्कर आना

देखने में कठिनाई, चेहरा झुकना

हाथ उठाने या पकड़ने में कठिनाई

ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।


डॉक्टर्स का कहना है कि 10 में से 8 मामलों में सिरदर्द प्राइमरी हेडेक (Primary Headache) होता है। दर्द महीने में दो बार हो या लंबे समय से नस में दर्द हो तो विशेषज्ञ चिकित्सक से दिखाना जरूरी है। फिजियोथेरेपी मदद कर सकती है, और यदि लाभ नहीं हो, तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।


स्वास्थ्य संबंधी अन्य सावधानियां

पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखें।

लेटे हुए स्थिति से उठते समय पहले करवट बदलें, फिर धीरे उठें।

मानसिक तनाव सिरदर्द और अन्य शारीरिक परेशानियों को बढ़ा सकता है।


गर्दन को अधिक झुकाकर रखना सर्वाइकल रोग और नस दबने का मुख्य कारण है। मोबाइल, लैपटॉप या अन्य उपकरणों का उपयोग करते समय गर्दन को सीधे और सीधा रखने की आदत डालना चाहिए। लगातार झुकाकर रहने से नसों और हड्डियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सिरदर्द, गर्दन का घूमना, कमजोरी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।


वहीं आम जनता से अपील की कि डिजिटल उपकरणों का उपयोग सावधानी और सीमित समय तक करें, नियमित स्ट्रेचिंग और व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। लकवा के बाद भी सिर में दर्द रहता है। इसके अलावा मानसिक तनाव से सिर दर्द होता है। आप एक बार चिकित्सक से जरूर दिखा लें। गर्दन को जितना झुकाये रखेंगे, परेशानी बढ़ती जाएगी। नस दबने से ही गर्दन का घूमना सामान्य नहीं रह पाता है। गर्दन पर बेवजह भार देने से सर्वाइकल की बीमारी का खतरा है।

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रिपोर्टर / लेखक

PRIYA DWIVEDI

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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