1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 08, 2026, 12:41:16 PM
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Iran-US Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया है, वहीं ईरान ने भी इस दौरान होर्मुज जलमार्ग को खोलने पर सहमति जताई है। इससे भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने ईरान पर बड़े हमले को रोकने की अपील की थी। साथ ही, ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित रूप से खोलने के संकेत के बाद अमेरिका ने दो सप्ताह तक बमबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया।
ईरान भी इस युद्धविराम के लिए तैयार हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनकी शर्तों को स्वीकार कर लिया गया है और अगले दो हफ्तों तक जहाजों को होर्मुज जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा। यह प्रक्रिया ईरानी सेना के समन्वय से पूरी की जाएगी।
बता दें कि युद्ध की शुरुआत में ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को बंद कर दिया था, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा। भारत का करीब 40% कच्चा तेल, 50% से अधिक एलएनजी और लगभग 90% एलपीजी इसी रास्ते से आता है। हालांकि बाद में ईरान ने भारत समेत चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों को ‘मित्र’ बताते हुए इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी थी।
जानकारी के अनुसार, भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि 16 अन्य जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें एलएनजी जहाज, एलपीजी टैंकर, कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, कंटेनर पोत और अन्य मालवाहक जहाज शामिल हैं। सरकारी अधिकारी के मुताबिक, 46,650 टन एलपीजी लेकर ‘ग्रीन सानवी’ टैंकर 7 अप्रैल को भारत पहुंचेगा, जबकि 15,500 टन गैस के साथ ‘ग्रीन आशा’ टैंकर 9 अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा।
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से करीब 90% आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में होर्मुज जलमार्ग के खुलने और टैंकरों के आगमन से देश में गैस सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में जहाजों की संख्या बढ़ने से ईंधन संकट का दबाव भी कम हो सकता है।