Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में कथित भेदभाव को लेकर दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाने और सभी श्रद्धालुओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुआई वाली पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं दाखिल करने वाले लोग वास्तविक श्रद्धालु नहीं होते, बल्कि उनका उद्देश्य कुछ और होता है।
याचिका दर्पन अवस्थी की ओर से दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि वे श्रद्धालु नहीं हैं। हम इस पर आगे कुछ नहीं कहना चाहते। इन लोगों का मकसद कुछ और होता है। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस पर नीति या दिशानिर्देश बनाना अदालत का काम नहीं है। हम न्यायिक प्रक्रिया के लिए हैं।
याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे विषयों पर निर्णय लेना या नीति बनाना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखने की स्वतंत्रता दी है।





