1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 15, 2026, 3:39:48 PM
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Raghav Chadha: राघव चड्ढा एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनके बयान या संसद की बहस नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला है। पंजाब सरकार द्वारा सुरक्षा हटाए जाने के कुछ ही दिनों बाद अब केंद्र सरकार ने उन्हें Z कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान कर दी है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब आम आदमी पार्टी के भीतर भी राघव चड्ढा को लेकर खींचतान की खबरें तेज हैं।
पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली थी। राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्हें यह उच्च स्तर की सुरक्षा दी गई थी, लेकिन अचानक इसे हटा लिया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई।
इसी बीच केंद्र सरकार ने मौजूदा सुरक्षा खतरे के आकलन के आधार पर उन्हें Z कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर अब उनकी सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी। यह सुरक्षा दिल्ली और पंजाब—दोनों जगहों पर लागू रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, जब तक पूरी औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक दिल्ली पुलिस को तत्काल प्रभाव से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। दरअसल, हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया था। इस फैसले के बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने कहा था कि उन्हें “खामोश किया गया है, पराजित नहीं किया गया।” उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल और बढ़ा दी थी।
इतना ही नहीं, उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर “आवाज उठाई, कीमत चुकाई” शीर्षक से एक वीडियो भी साझा किया था, जिसमें संसद के अंदर उनके भाषण और मुद्दे उठाने के क्लिप्स शामिल थे। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने साफ संदेश देने की कोशिश की कि वह अपने काम को लेकर किसी भी आलोचना से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
पार्टी की ओर से उन पर यह आरोप लगाया गया था कि वह संसद में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ मुखर नहीं रहे और ज्यादा ध्यान अपने प्रचार पर देते रहे। हालांकि, चड्ढा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका काम हंगामा करना नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों को उठाना है।
अब सुरक्षा को लेकर हुए इस नए फैसले ने पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ पार्टी के अंदर खींचतान, दूसरी तरफ केंद्र द्वारा दी गई सुरक्षा—इन सबके बीच राघव चड्ढा की राजनीतिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।